मानवाधिकार आयोग पहुंचे परिजन, पुलिस कमिश्नर-अस्पताल प्रबंधकों से मांगा जवाब

ओरिसन सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में मोगा निवासी जसवीर कौर (72) के शव बदलने का मामला अब पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग, चंडीगढ़ पहुंच गया है। मंगलवार को परिवार किसान जथेबंदियों के साथ मिलकर मानव अधिकार आयोग के सामने पेश हुए और लिखित में शिकायत देते हुए कार्रवाई की जांच की मांग की है। जिस पर तुरंत मानव अधिकारी आयोग की तरफ से लुधियाना पुलिस कमिश्नर और अस्पताल से को नोटिस जारी किया है। जसवंत सिंह ने आयोग को लिखी शिकायत में संदेह जताया है कि अस्पताल की ओर से उनकी प|ी जसवीर कौर के शारीरिक अंगों की तस्करी की है। इसकी जानकारी बहार न आए, इसलिए शव बदलने का दिखावा किया जा रहा है। वह पूरा दिन अस्पताल में धरना प्रदर्शन पर बैठे रहे। लेकिन उन्हें अस्पताल से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अस्पताल ने उन्हें अस्थियां देने की बात कही। लेकिन उन्होंने लेने से मना कर दिया है। शिकायत में पुलिस पर अस्पताल की मदद करने का आरोप लगाते हुए अब तक की कार्रवाई पर भी गहरा असंतोष जताया गया है। जसवंत ने आयोग से मांग की है कि उनके पत्नी के शव की सही जानकारी साझा की जाए। पत्नी के शव चोरी होने की पूरी जांच कर असली आरोपी उनके सामने पेश किया जाए। मानवाधिकार आयोग ने उनकी शिकायत लेते हुए लुधियाना पुलिस कमिश्नर और अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। असली मंजू दीवान का भी अंतिम संस्कार वहीं मामले में थाना सराभा नगर के एसएचओ आदित्या शर्मा के अनुसार, मंजू दीवान के शव को दीवान परिवार अस्पताल से ले गया और उनका अंतिम संस्कार करवा दिया है। वहीं हंगामा होने के 48 घंटे बाद भी जसवीर का परिवार खाली हाथ है। अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें अपनी निजी जांच रिपोर्ट तक नहीं सौंपी है। मंजू दीवान के परिवार पर गंभीर आरोप बकौल जसवंत सिंह, अस्पताल पहुंचे तो जिस रेफ्रिजरेटर में शव था। उस पर मंजू लिखा था। पढ़ने के बाद उन्होंने शव देखा। तो फिर ये कैसे संभव है, जसवीर के नाम की स्लिप दीवान परिवार ने नहीं देखी। सभी धर्मों में अंतिम दर्शन करने का रिवाज होता है तो क्या परिवार तब भी मंजू का शव नहीं पहचान सका। उन्हें शक है पुलिस अस्पताल प्रबंधकों की मदद कर रहा है, क्योंकि सिर्फ अज्ञात स्टाफ पर केस दर्ज किया है। कोई जानकारी नहीं दी जा रही। अभी भी सवाल अनसुलझे {पुलिस ये पता नहीं लगा सकी कि शव अस्पताल से बाहर कैसे गया। {अस्पताल प्रबंधक शव के बदलने की बात कह रहे हैं, लेकिन मोर्चरी में तैनात जिम्मेदार व्यक्ति की जानकारी नहीं दें रहे है। {अस्पताल कोई दस्तावेज नहीं दिखा रहा, जिनसे शवों के बदलने की पुष्टि हो सके।

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