UIT बना रही सैंदर्यीकरण की योजना भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा पटेलनगर में स्थित मानसरोवर झील के मूल स्वरूप से छेड़छाड़, गंभीर प्रदूषण तथा 20 करोड़ रुपए की कथित अवैध सौंदर्यीकरण योजना को लेकर एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी ने इस मामले में यूआईटी, राज्य सरकार, डीएमएफटी और कलेक्टर सहित अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए। 90 दिनों के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए। यह कार्रवाई पब्लिक अवेयरनेस सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष गोटू सिंह मंगलपुरा की ओर से दायर जनहित याचिका पर की। याचिका को एनजीटी ने स्वीकार करके दर्ज कर लिया है। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट कु. लक्ष्मी जादौन, परिक्षित शर्मा एवं शरद कुमार शुक्ला ने पक्ष रखा। एडवोकेट जादौन ने बताया कि मानसरोवर झील पहले सिंचाई विभाग के अधीन किशनावतों की खेड़ी तालाब थी, जिसका क्षेत्रफल सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड अनुसार 27 हेक्टेयर (लगभग 116 बीघा) था। राज्य मंत्रिपरिषद के 2 अक्टूबर 2000 के आदेश के तहत यह तालाब ग्राम पंचायत आटूण को सौंपा गया। बाद में शहरी क्षेत्र में शामिल होने पर इसे यूआईटी को हस्तांतरित कर दिया गया। आरोप है कि यूआईटी ने तालाब के आधे से अधिक क्षेत्र को आवासीय एवं व्यावसायिक निर्माण के लिए आवंटित कर दिया, जबकि कानूनन तालाब का अन्य उपयोग नहीं किया जा सकता। लीगल नोटिस का भी नहीं दिया जवाब संस्था ने 25 सितंबर 2025 को राज्य के मुख्य सचिव, यूआईटी, जल संसाधन विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लीगल नोटिस भेजकर सौंदर्यीकरण योजना रद्द करने, झील की सफाई करने और सीवेज का प्रवाह रोकने की मांग की थी। बावजूद इसके, किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई।


