आगर मालवा स्थित मालवी नस्ल का एकमात्र पशु प्रजनन केंद्र इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं और विवादों के कारण चर्चा में है। केंद्र के सभी 22 आउटसोर्स कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे पशु प्रजनन केंद्र की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। इसका सीधा असर केंद्र में मौजूद गोवंश और भैंसवंश पर पड़ रहा है। हड़ताल के कारण पशुओं के शेड की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है, जिससे जगह-जगह गंदगी फैल गई है और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। पशुओं को पर्याप्त आहार भी नहीं मिल पा रहा है, जिसका उनकी सेहत पर प्रतिकूल असर हो रहा है। केंद्र में कई गोवंश लंपी वायरस से प्रभावित बताए जा रहे हैं, जिनका समय पर इलाज नहीं हो पा रहा। मंगलवार को एक बीमार भैंस को तड़पते हुए देखा गया, जिससे पशु प्रेमियों में चिंता है। हड़ताल पर गए कर्मचारियों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारी पंकज चौहान ने बताया कि पशुओं के इलाज के लिए आई कुछ दवाइयों को परिसर में बंद पड़े गोबर गैस प्लांट में फेंक दिया गया है, जिससे उनका उपयोग नहीं हो पा रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पशुओं को दिया जा रहा भूसा मिट्टी युक्त है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। कर्मचारियों के अनुसार, मृत पशुओं का विधिवत अंतिम संस्कार भी नहीं किया जा रहा है। उन्हें केंद्र के पीछे जंगल में फेंक दिया जाता है, जहां वे कुत्तों और अन्य जानवरों का भोजन बन रहे हैं। वहीं, केंद्र प्रबंधक डॉ. राजीव खरे ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने दावा किया कि सभी व्यवस्थाएं सामान्य हैं और पशुओं की देखभाल में कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही है। प्रबंधन ने बताया कि हड़ताल के चलते वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कुछ मजदूर लगाए गए हैं, ताकि पशुओं की देखरेख जारी रह सके। डॉ. खरे ने लंपी वायरस से पशुओं के ग्रसित होने की बात स्वीकार की है। उन्होंने पशुओं के अंतिम संस्कार में लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई करने की बात भी कही है।


