मध्यप्रदेश में 23 और 24 जनवरी को मावठा गिरने यानी, बारिश का अलर्ट है। ऐसा स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से होगा। ग्वालियर-रीवा समेत 10 जिलों में असर रहेगा। इस दौरान कोहरा भी छाया रहेगा। बुधवार सुबह भी कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का असर देखा जा रहा है। आज ग्वालियर, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में मध्यम कोहरा रहा। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई शहरों में हल्के कोहरे का असर देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार, रात के तापमान स्थिर रहे। दिन में धूप खिली रहने से ठंड का असर नहीं रहेगा। न्यूनतम और अधिकतम दोनों ही तापमान में बढ़ोतरी होगी। जनवरी के आखिरी में तेज ठंड रहेगी
मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस गुजरने के बाद ठंड का एक और दौर आएगा। पारे में गिरावट हो सकती है। कोल्ड वेव यानी, शीतलहर चलने का अनुमान भी है। जनवरी के आखिरी दिनों में ऐसा होगा। इससे पहले दिन में गर्मी और रातें ठंडी रहेगी। कब-कहां बारिश होने का अनुमान 23 जनवरी- ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड और दतिया।
24 जनवरी- ग्वालियर, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज। प्रदेश में सबसे ठंडा मंदसौर, इंदौर में भी पारे में गिरावट
मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार-मंगलवार रात प्रदेश का सबसे ठंडा शहर मंदसौर रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। राजगढ़ में 6.6 डिग्री, शाजापुर में 7.1 डिग्री, दतिया में 8.6 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री, मंडला-खजुराहो में 9.5 डिग्री दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 9.8 डिग्री, इंदौर में 8.4 डिग्री, ग्वालियर में 10 डिग्री, उज्जैन में 9.8 डिग्री और जबलपुर में पारा 14.5 डिग्री सेल्सियस रहा। बाकी शहरों में भी न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी रही और यह 10 डिग्री से ऊपर ही रहे। अभी दो सिस्टम एक्टिव
मौसम विभाग के अनुसार, अभी एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस पाकिस्तान के ऊपर है, जो 21 जनवरी की रात में उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। इसके असर से ही 23 और 24 जनवरी को मध्यप्रदेश में बारिश होने के आसार है। इसके अलावा एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन की एक्टिविटी है। मंगलवार को नर्मदापुरम समेत कई जिलों में बादल रहे। उत्तर भारत के ऊपर 12.6 किमी की ऊंचाई पर करीब 241 किलोमीटर प्रतिघंटा के हिसाब से जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही है। इसका असर प्रदेश के कुछ शहरों में देखा जा रहा है। क्या होता है वेस्टर्न डिस्टरबेंस
मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम से आने वाली हवा और बादलों का एक सिस्टम होता है। इसके एक्टिव होने से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी, मैदानी क्षेत्रों में बारिश होगी। सिस्टम आगे गुजर जाने के बाद उत्तर से आने वाली हवा ठंडी रहती है। जिससे दिन-रात ठंड का असर रहता है। ठंड के लिए इसलिए खास है जनवरी
मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त अहम रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं, इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे। MP के 5 बड़े शहरों में जनवरी में ऐसा रहा सर्दी का ट्रेंड… भोपाल में 0.6 डिग्री पहुंच चुका टेम्परेचर
भोपाल में जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। वहीं, दिन में गर्मी का एहसास और बारिश का ट्रेंड भी है। 18 जनवरी 1935 को रात का टेम्परेचर रिकॉर्ड 0.6 डिग्री सेल्सियस रहा था। वहीं, 26 जनवरी 2009 को दिन में तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। पिछले 10 में से 7 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सबसे ज्यादा 2 इंच बारिश 6 जनवरी 2004 को हुई थी। वहीं, सर्वाधिक मासिक 3.8 इंच बारिश जनवरी 1948 में हुई थी। इंदौर में माइनस 1.1 डिग्री पहुंच चुका पारा
इंदौर में जनवरी में सर्दी का रिकॉर्ड माइनस में पहुंच चुका है। 16 जनवरी 1935 में पारा माइनस 1.1 डिग्री दर्ज किया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 27 जनवरी 1990 को दिन का तापमान 33.9 डिग्री रहा था। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 के नाम है। इस दिन 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, वर्ष 1920 में सर्वाधिक मासिक बारिश 4 इंच दर्ज की गई थी। जबलपुर में 1946 में रिकॉर्ड 1.1 डिग्री रहा था पारा
जबलपुर में भी जनवरी में ठंड-बारिश का ट्रेंड है। इस महीने सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। 7 जनवरी 1946 को रात का पारा रिकॉर्ड 1.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। वहीं, दिन का उच्चतम तापमान 33.4 डिग्री 7 जनवरी 1973 को रहा था। इस महीने बारिश भी होती है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 24 जनवरी 1919 को 2.5 इंच हुई थी। इसी साल पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। उत्तरी हवा आने से ग्वालियर सबसे ठंडा
उत्तरी हवाओं की वजह से प्रदेश का ग्वालियर-चंबल सबसे ठंडा रहता है। जनवरी में यहां कड़ाके की ठंड का ट्रेंड है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो 2018 में तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया था। 24 जनवरी 1954 को रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री रहा था। ग्वालियर में जनवरी में बारिश भी होती है। साल 2014 से 2024 के बीच 9 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 8 जनवरी 1926 को है। इस दिन 2.1 इंच पानी गिरा था। वहीं, 1948 को कुल मासिक बारिश 3.1 इंच हुई थी। उज्जैन में जीरो डिग्री रह चुका पारा
उज्जैन में भी उत्तरी हवा का असर रहता है। इस वजह से यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को पारा 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। पिछले 10 साल में टेम्परेचर 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस तक रह चुका है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 के नाम है। इस दिन सवा इंच पानी गिरा था। वहीं, सर्वाधिक कुल मासिक 2.2 इंच 1994 को हुई थी।


