केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में अपने आवास से वाटरशेड यात्रा की वर्चुअल शुरुआत की। जल लाए धन-धान्य थीम पर आधारित वाटरशेड यात्रा 26 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में 6 हजार 673 ग्राम पंचायतों के 13 हजार 587 गांवों तक जाएगी। यह यात्रा मिट्टी और पानी के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करेगी। वाटरशेड के अंतर्गत ग्रामीण इलाकों में चेक डैम, बोरी बंधान, मेढ़ बंधान, खेत तालाब जैसी कई संरचनाएं बनाई जाएंगी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, इस विशेष अभियान को जनता का आंदोलन बनाएं, जन-जन इसमें जुड़ जाए। हम जनता के सहयोग से जल संरचनाएं बनाएं, माटी के संरक्षण की योजनाएं बनाएं। इस वाटरशेड यात्रा के दौरान पानी और माटी बचाने के लिए जनजागरण अभियान चलेगा और वाटरशेड के अंतर्गत पूर्ण किए गए कामों का लोकार्पण भी होगा और नए कामों का भूमिपूजन भी होगा। वाटरशेड महोत्सव भी मनाया जाएगा। वाटरशेड पंचायत उल्लेखनीय कार्य करने वालों को सम्मानित भी करेगी। ये वाटरशेड यात्रा देशभर में जल संचयन और भूमि संरक्षण को बढ़ावा देगी। ये यात्रा पानी और माटी बचाने के लिए ग्रामीण जनता को एक मंच भी प्रदान करेगी। दो साल चलेगी जनभागीदारी प्रतियोगिता
शिवराज सिंह ने कहा कि, अगले 2 सालों के लिए जनभागीदारी प्रतियोगिता का शुभारंभ किया जा रहा है। अगर जनभागीदारी से हम बेहतर जल संरचना बनाते हैं, भूमि के क्षरण को रोकते हैं तो श्रेष्ठ काम करने वाली परियोजनाओं को अतिरिक्त 20 लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके लिए 70 करोड़ 80 लाख रुपए का प्रावधान भी किया है। हर साल 177 परियोजनाएं इससे लाभान्वित होंगी। वाटरशेड यात्रा ऐसे तय करेगी सफर शिवराज बोले- अपनों के लिए मिट्टी पानी बचाएं
वाटरशेड यात्रा को लेकर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, जल हमारे जीवन का आधार है, जल है तो जीवन है। हम माटी से पैदा हुए और माटी में ही मिलते हैं। माटी हमारा अस्तित्व है, हमारा आधार है। इसलिए मैं आह्वान करता हूं। अपने लिए और अपनों के लिए पानी और मिट्टी बचाएं। वाटरशेड यात्रा के दौरान 1 हजार 509 ग्राम सभाएं आयोजित की जाएगी और 1 हजार 640 प्रभात फेरियां भी आयोजित की जाएगी। साथ ही 2 हजार 43 स्थानों पर भूमिपूजन और 1 हजार 999 कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। साथ ही 1 हजार 196 स्थानों पर श्रमदान और 557 स्थानों पर बागवानी वृक्षारोपण किया जाएगा। धरती को बचाने की यात्रा
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजनरी सोच के कारण भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग मिट्टी और जल संरक्षण के लिए पीएम कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत वाटरशेड विकास घटक की योजना को क्रियान्वित कर रहा है। इस वॉटर शेड के अंतर्गत चेक डेम, बोरी बंधान, मेढ़ बंधान, खेत तालाब जैसी कई संरचनाएं बनाई जाएंगी। ये संरचनाएं पानी भी बचाएंगे और माटी के क्षरण को भी रोकेंगे, सतही जल भी बहकर नहीं जायेगा और भूजल स्तर भी बढ़ेगा। भरा हुआ सतही जल आसपास के बड़े इलाके में भूजल स्तर बढ़ा देगा। माटी में नमी बनेगी, माटी की जल धारण क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि, जरूरी है कि, हम इस योजना के साथ जुड़ें, ये काम अकेले सरकार नहीं कर सकती है, सरकार के साथ समाज का सहयोग भी बेहद जरूरी है। हर गांव को, किसानों को, पंचायतों, जनप्रतिनिधि, माता, बहनों, NGO, सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को जोड़ना है। इसके लिए हमने वाटरशेड यात्रा निकालने का संकल्प लिया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, ये महज यात्रा नहीं बल्कि धरती को बचाने की यात्रा है। आने वाली पीढ़ियों को बचाना है
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, जल और मिट्टी दोनों ठीक दशा में न रहें, तो हमारी जिंदगी की दशा क्या होगी? हमारी आने वाली पीढ़ियों का क्या होगा..? हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूरदर्शी हैं, वो आने वाले 50 साल, 100 साल की सोचते हैं, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोचते हैं। बिगड़ते हुए पर्यावरण के कारण भूजल का स्तर क्या रह गया है? कई जगह पानी हजार से डेढ़ हजार फीट के नीचे चला गया है। कुछ सालों पहले नदियां बहती थी, कुएं में ऊपर तक पानी रहता था। आज कुएं भी सूख गए हैं और नदियों की धार भी खत्म हो गई। आने वाले कल में हमारी पीढ़ियां कैसे जीवित रहेंगी, इस बारे में हम सभी को सोचना पड़ेगा। पानी आज विश्व का सबसे बड़ा मुद्दा है। हमें पानी बचाना है, भूजल स्तर को ठीक करना है। शिवराज सिंह ने कहा कि, घाटों का क्षरण हो रहा है, कई जगह जमीन बंजर हो रही है, उपजाऊ माटी बह रही है। ऐसा होता रहा तो क्या कृषि की उपज होती रहेगी..? हमें पानी भी बचाना है, माटी भी बचाना है और हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी बचाना है।


