धमतरी| बच्चों में होने वाले बाल मधुमेह के बचाव के लिए एएनएम और मितानिन समूह का उन्मुखीकरण कार्यशाला हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य सभी स्वास्थ्यकर्मियों को टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) का स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव और इसकी जल्द से जल्द पहचान, उसके अनुरूप इलाज और विभिन्न पहलुओं के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई। डॉ. शीला साहा ने कहा कि यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय एवं प्रेरक कदम है। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग और डॉ. गजेंद्र सिंह, स्वास्थ्य विशेषज्ञ यूनिसेफ के नेतृत्व में यूनिसेफ की टीम द्वारा प्रशिक्षण दिया। मुख्य रूप से टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार व प्रबंधन, काउंसलिंग, रोगी सहायता समूह की भूमिका, समुदाय आधारित जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य तथा पारिवारिक सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।


