मिनीमाता बांगो जलाशय में ठेका प्रथा बंद करने की मांग:आदिवासी मछुआरे कलेक्टर को सौंपेंगे ज्ञापन, मालिक बने मजदूर

कोरबा में हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय क्षेत्र के आदिवासी मछुआरे 9 फरवरी को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। यह ज्ञापन जलाशय में ठेका प्रथा और विस्थापित मछुआरा समुदायों की समस्याओं के संबंध में होगा। किसान सभा ने इस आंदोलन का समर्थन किया है। किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने बताया कि रैली दोपहर 12 बजे तानसेन चौक से शुरू होकर कोरबा कलेक्ट्रेट पहुंचेगी। मछुआरा संघ के अध्यक्ष फिरतु बिंझवार के अनुसार, ज्ञापन में मिनीमाता बांगो (हसदेव) जलाशय में लागू ठेका व्यवस्था, ग्राम सभाओं के प्रस्तावों और वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत सामुदायिक अधिकारों से संबंधित मुद्दों को उठाया जाएगा। इसमें मछुआरा समुदाय के साथ हाल की घटनाओं का भी जिक्र होगा और समस्याओं के समाधान की मांग की जाएगी। जिला प्रशासन को इस संबंध में पहले ही सूचित कर दिया गया है। बिंझवार ने ठेका प्रथा को बंद करने की मांग की बिंझवार ने ठेका प्रथा को बंद करने की मांग की है। उनका कहना है कि हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय क्षेत्र में मछली पालन और मछली पकड़ने के लिए लागू ठेका व्यवस्था समाप्त की जाए। इसके बजाय, स्थानीय लोगों को सीधे काम दिया जाए और सरकार उनसे रॉयल्टी ले, जिससे उन्हें सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेका प्रथा के कारण आदिवासी, जो इस क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन पर अपना अधिकार रखते हैं, अब ठेकेदारों के अधीन मजदूर के रूप में काम करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि मालिक को मजदूर बना दिया गया है। मछुआरा समुदाय पहले भी अपनी मांगों को लेकर कई बार आंदोलन और पत्राचार कर चुका है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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