भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा गीदम वेयरहाउस में 33 हजार क्विंटल चावल खराब होने का असर अब सीधे आम लोगों पर पड़ रहा है। मिलरों ने प्रशासन के निर्देश के बाद जो चावल दिया था, जांच में वो भी फेल हो गया है। ऐसे में 11 फरवरी बीतने के बाद भी जिले की पीडीएस दुकानों में पर्याप्त चावल नहीं है। आलम ये है कि जिन दुकानों में 100 क्विंटल चावल की जरूरत है, वहां सिर्फ 70 क्विंटल ही भेजा जा रहा है। नतीजतन फरवरी महीने का राशन सभी हितग्राहियों को एकसाथ मिलना मुश्किल है। खाद्य विभाग को फिलहाल 50 प्रतिशत सेंट्रल एफआरके चावल ही मिल रहा है, वह भी सीधे ट्रांसपोर्ट होकर गोदाम पहुंच रहा है। वहीं से दुकानों को भेजा जा रहा है। गोदाम में पर्याप्त स्टॉक नहीं है। राज्य से मिलने वाला 50 प्रतिशत चावल अभी नहीं पहुंच पाया है, जिससे पूरी वितरण व्यवस्था चरमरा गई है। जिले की 173 पीडीएस में से कई दुकानों में चावल नहीं पहुंचा है। गीदम कांड के बाद नान (नागरिक आपूर्ति निगम) अब फूंक-फूंककर कदम रख रहा है, लेकिन सख्ती के बीच नई समस्या खड़ी हो गई है। हाल ही में खरीदे गए धान से तैयार चावल की गुणवत्ता जांच में दंतेवाड़ा के मिलर का लॉट फेल हो गया। कुआकोंडा वेयरहाउस में राधे एग्रो का दो लॉट चावल गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। करीब 1150 पैकेट चावल अब वापस मिलर को लौटाए जाएंगे। मिलर धान की गुणवत्ता खराब होने का हवाला दे रहे हैं, लेकिन नान इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है। एक क्वालिटी इंस्पेक्टर की लापरवाही से पहले ही 33 हजार क्विंटल चावल खराब हो चुका है। ऐसे में जांच में सख्ती बरती जा रही है। डीएम नान टीके यदु ने कहा, एक दाना भी खराब चावल गोदाम में नहीं रखेंगे । धान सख्ती से गुणवत्ता वाला खरीदा गया है तो चावल भी अच्छा ही लेंगे। मिलर द्वारा दिया चावल फेल हुआ है। 22 मिलरों को आदेश, फिर भी वापसी शुरू नहीं राज्य सरकार ने 28 जनवरी को 22 मिलरों को खराब चावल वापस उठाने और उसके बदले गुणवत्ता वाला चावल जमा करने का आदेश दिया था। आदेश जारी हुए 15 दिन से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन गीदम वेयरहाउस से खराब चावल की वापसी अब तक शुरू नहीं हो पाई है। गोदाम में पड़े-पड़े चावल की स्थिति और खराब होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि गीदम वेयरहाउस की लापरवाही का खामियाजा अब जिले के हजारों राशन कार्डधारियों को भुगतना पड़ रहा है।


