बालाघाट में 127 राइस मिलर्स ने सोमवार को प्रशासन को अपनी मिलों की चाबियां सौंप दीं। मिलर्स प्रदेश सरकार की नई मिलिंग नीति, दो साल से बकाया 120 करोड़ रुपए की मिलिंग राशि का भुगतान न होने और मिलिंग दर घटाकर 60 रुपए प्रति क्विंटल किए जाने से नाराज हैं। बालाघाट एक प्रमुख धान उत्पादक जिला है, जहां बड़ी संख्या में राइस मिलर्स कार्यरत हैं। ये मिलर्स वर्षों से सरकार की किसानों से खरीदी गई धान की मिलिंग का अनुबंध करते आ रहे थे। हालांकि, इस साल मिलर्स ने सरकार के साथ मिलिंग का अनुबंध नहीं किया है, जिसके कारण उपार्जित धान का उठाव नहीं हो पाया है। प्रशासन को सौंपी चाबियां मिलर्स अब तक शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे थे। लेकिन, प्रशासन के मिलिंग न करने पर राइस मिलों में तालाबंदी के आदेश के बाद, मिलर्स ने अपना विरोध तेज कर दिया। सोमवार को कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में उन्होंने अपनी असहमति जताई और मिलों की चाबियां प्रशासन को सौंप दीं। प्रशासन स्वयं मिलिंग करवाए मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद ठाकरे ने कहा कि मिलिंग में तालाबंदी करने के बजाय प्रशासन स्वयं मिलिंग करवाए। उन्होंने बताया कि पहले मिलर्स को 250 रुपए प्रति क्विंटल मिलिंग राशि मिलती थी, जिसे बाद में 120 रुपए और अब घटाकर 60 रुपए कर दिया गया है। ठाकरे ने यह भी बताया कि पहले 90 प्रतिशत चावल राज्य सरकार और 10 प्रतिशत भारत सरकार के गोदाम में जमा करना होता था। नए नियम के तहत अब 90 प्रतिशत चावल भारत सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार को देना होगा, जिसे मिलर्स अपने लिए उचित नहीं मानते। इसी कारण उन्होंने मिलिंग न करने का निर्णय लिया है।


