मिस्ट्री बना हवलदार सुसाइड केस, उलझन में पुलिस:मौत से पहले पत्नी से आखिरी शब्द बोले- अभी कपड़े बदलकर आता हूं फिर नहीं लौटा

ग्वालियर में प्रधान आरक्षक (हवलदार) दीपक श्रीवास का सुसाइड पुलिस के लिए मिस्ट्री बन गया है। 24 घंटे बाद भी पुलिस सुसाइड की वजह नहीं तलाश पाई है। पुलिस अफसर थाने में वर्क लोड, घरेलू क्लेश व पर्सनल लाइफ में परेशानी के एंगल पर जांच कर रहे हैं। शनिवार-रविवार की दरमियानी रात 12:30 बजे हवलदार थाटीपुर थाना में ड्यूटी कर लौटा था। जब घर पहुंचा तो पत्नी ने दरवाजा खोला और पूछा खाना लगा दूं।
दीपक ने पत्नी से जो आखिरी शब्द कहे थे वह थे “अभी कपड़े बदलकर आता हूं’ इसके बाद पत्नी इंतजार करती रही, लेकिन पति कभी वापस नहीं लौटा। काफी देर हो गई तो पत्नी रूम में पहुंची, लेकिन दरवाजा अंदर से लॉक था। पत्नी ने शोर मचाया तो आसपास रहने वाले पुलिस लाइन के साथी पहुंच गए। दरवाजा तोड़ा तो अंदर प्रधान आरक्षक फांसी पर लटका हुआ था। उसे तत्काल हॉस्पिटल पहुंचाया, लेकिन तब तक मौत हो चुकी थी। ऐसे समझिए पूरा मामला
बहोड़ापुर पुलिस लाइन में पत्नी, दो बेटियों के साथ रहने वाला 37 वर्षीय दीपक पुत्र राकेश श्रीवास मूल रूप से भिंड के रहने वाले थे। मुरैना में उनका ननिहाल है। दीपक मध्य प्रदेश पुलिस में प्रधान आरक्षक था। अभी शहर के थाटीपुर थाना में पदस्थ था। वह थाटीपुर थाना के तेज तर्रार पुलिस कर्मियों में शुमार था। शनिवार को उसकी ड्यूटी थी। रात 12:30 बजे वह थाटीपुर थाना से ड्यूटी कर घर लौटा था। उसके घर पहुंचते ही पत्नी ने दरवाजा खोला। पत्नी उसका इंतजार कर रही थी। दीपक ने पत्नी से कोई बात नहीं की। पत्नी ने पूछा कि खाना लगा दूं तो प्रधान आरक्षक ने कहा कि खाना लगा दो अभी कपड़े बदलकर आता हूं। इसके बाद वह दूसरे रूम में चला गया। पर 15 मिनट हो गए और वह वापस नहीं लौटा तो पत्नी को संदेह हुआ। रूम के पास पहुंची तो दरवाजा बंद था। काफी खटखटाने के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला तो उसने शोर मचाया। आसपास के लोग एकत्रित हुए। सभी पुलिसकर्मी थे तो तत्काल दरवाजा की कुंडी तोड़ दी। अंदर प्रधान आरक्षक दीपक ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया था।
एक्सीडेंट में पिता की हुई थी मौत, तब मिली थी नौकरी
प्रधान आरक्षक दीपक श्रीवास के पिता राकेश श्रीवास भी मध्य प्रदेश पुलिस में आरक्षक थे। साल 2008 में वह गोला का मंदिर में एक विवेचना के लिए गए थे तभी सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई थी। उस समय दीपक की उम्र सिर्फ 20 साल थी। पिता की मौत के बाद उसे अनुकंपा नियुक्त सन 2009 में मिली थी। साल 2009 से वह मध्य प्रदेश पुलिस में नौकरी कर रहा है। मई 2025 में उसको प्रमोशन मिला था और वह आरक्षक से प्रधान आरक्षक बना था।
सुसाइड से पहले की कॉम्बिंग गश्त
शनिवार रात को प्रधान आरक्षक दीपक श्रीवास ने केस डायरी पर टीआई विपेन्द्र सिंह चौहान के साइन कराए और उसके बाद कॉम्बिंग गश्त करने चला गया। शनिवार रात दीपक की दोनों बेटियां अपनी दादी के पास थीं। घर पर सिर्फ उसकी पत्नी थी। समझा जा रहा है कि दीपक और उसकी पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ होगा, जिसके बाद दीपक ने तैश में आकर फांसी लगा ली। पत्नी बेसुध, मां का बुरा हाल
रात करीब 3 बजे प्रधान आरक्षक दीपक श्रीवास के साले आकाश मथुरिया ने उसके भाई शुभम (जोअपनी मां के साथ विनय नगर सेक्टर-2 वाले घर में था) को फोन पर सूचना दी। भाई ने फांसी लगा ली है, इस बात की सूचना तुरंत मां को नहीं दी। बल्कि सुबह उन्हें इसकी जानकारी दी गई। घटना के बाद दीपक की पत्नी बेसुध हो गई थी। उसे तो होश ही नहीं था।
आखिरकार सुसाइड का कारण क्या है
पुलिस अधिकारी लगातार इस बात की जांच कर रहे हैं कि आखिरकार प्रधान आरक्षक की खुदकुशी का कारण क्या है? ऐसी क्या परेशानी थी कि मजबूत इरादे वाले पुलिसकर्मी ने यह कदम उठा लिया। पुलिस हर एंगल पर जांच कर रही है। थाने में कोई वर्क लोड तो नहीं था। पत्नी से कोई मनमुटाव तो नहीं था या फिर पुलिसकर्मी की लाइफ में कोई अलग ही परेशानी तो नहीं थी। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। जिस कारण पुलिस ने मृतक हवलदार का मोबाइल निगरानी में लिया है।
पुलिस का कहना है
टीआई बहोड़ापुर आलोक सिंह परिहार का कहना है कि एक पुलिसकर्मी ने सुसाइड किया है। पुलिस जांच कर रही है कि उसने यह कदम क्यों उठाया। फिलहाल परिजन की स्थिति देखते हुए उनसे बातचीत नहीं हो पाई है। ये खबर भी पढ़िए… ग्वालियर में प्रधान आरक्षक ने किया सुसाइड ग्वालियर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र स्थित पुलिस लाइन में रहने वाले प्रधान आरक्षक दीपक श्रीवास ने अपने सरकारी क्वार्टर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। पढ़ें पूरी खबर…

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