मीनल चौबे ने कहा -:भाजपा का फोकस महिला शक्ति पर, इसलिए 26 वार्डों में महिलाओं को टिकट दिया

शहरी सरकार का चुनावी माहौल चरम पर है। मतदाताओं में भी भावी महापौर को लेकर चर्चा छिड़ गई है। भाजपा से महापौर प्रत्याशी मीनल चौबे वार्ड-वार्ड का दौरा कर लोगों से मिल रही हैं। नगर निगम को चलाने के विजन और उनकी भूमिका को लेकर आम जनता अनभिज्ञ है। प्रत्याशी और आम लोगों के बीच संवाद की इस कमी को पूरा करने का जरिया बना दैनिक भास्कर। शुक्रवार को भास्कर कार्यालय में नेताजी न्यूज रूम में… सीरीज के जरिए मीनल चौबे ने लोगों के जेहन में उठने वाले सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि अगर वे मेयर बनीं तो निगम का माहौल बदला हुआ मिलेगा। एमआईसी मेंबर से लेकर निचले स्तर के अमले तक कसावट दिखेगी। महिला विकास पर काम होगा। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाएंगे। पैसों का दुरुपयोग नहीं होगा और ट्रिपल इंजन की रफ्तार से शहर का विकास होगा। पढ़िए प्रमुख सवालों पर उनके जवाब- एक महिला का शहर का प्रथम नागरिक बनना किस मायने में महत्वपूर्ण है?
मीनल: शहर की प्रथम नागरिक अगर महिला रहेगी तो निश्चित रूप से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। महिलाओं का सर्वांगीण विकास का प्रयास करेंगे। ये भी बताएंगे कि महिलाएं घर-परिवार और चूल्हा-चौकी के साथ शहर के विकास में भी सहभागी बन सकती हैं।
राजधानी बनने के 24 सालों बाद भी सफाई, पानी और बिजली की समस्याएं हैं, ऐसा क्यों?
मीनल: निगम का मूल काम मूलभूत सुविधाएं देना है। पिछले कार्यकाल में तालाब के फव्वारे पर 5 करोड़ रुपए फूंके गए। सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों खर्च कर उसे बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया गया।
आप निगम में तीन कार्यकाल से सक्रिय हैं। नई जिम्मेदारी मिलने पर आपका विजन और प्राथमिकताएं क्या होंगी?
मीनल: मैं 15 साल से निगम में हूं, इसलिए पता है कि पब्लिक के लिए क्या किया जा सकता है। लेकिन इस दौरान कांग्रेस की सरकार रही। लोगों को अभी भी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भटकना पड़ रहा है। हमारी प्राथमिकता होगी कि निगम में हर काम एक क्लिक में हो। पेयजल, बिजली, सफाई पर प्लानिंग से काम होगा।
निगम में एमआईसी मेंबर अपने कक्ष में नहीं बैठते। लोगों की समस्या उन तक पहुंच नहीं पाती। इसका कोई विकल्प?
मीनल : पिछले तीन से कांग्रेस की एमआईसी रही है। कांग्रेस में अनुशासन की कमी होती है। मैं जीती तो पहले सवाल करूंगी, निगम में समय देंगे। वे राजी हों तभी एमआईसी सदस्य बनाऊंगी।
क्या पिछले कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचारों की जांच करवाएंगी। अपने कार्यकाल को भ्रष्टाचार से मुक्त रखने के लिए क्या करेंगी?
मीनल: पिछले पांच साल में बड़े भ्रष्टाचार हुए हैं। हमने विपक्ष में रहते हुए इन्हें पूरी ताकत से उठाया। हम जीतकर आए तो जांच कराएंगे। हमारी सरकार पूरी पारदर्शिता से काम करेगी।
वार्ड में 45-50 सफाईकर्मी तय होते हैं, लेकिन जांच में आधे मिलते हैं। हम स्वच्छता सर्वे में पिछड़ रहे हैं? कैसे सुधारेंगे?
मीनल: इसके लिए महापौर और कमिश्नर जिम्मेदार हैं। आधे कर्मचारियों की तनख्वाह अगर कमीशन में बंटती है तो सफाई कहां होगी। हमारे कार्यकाल में ऐसा बिलकुल भी नहीं चलेगा।
सिविल ठेके जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों व परिचितों ही मिलते हैं, ऐसे में काम में पारदर्शिता और गुणवत्ता कैसे आएगी?
मीनल: रिश्तेदार तो वैसे भी कोई काम नहीं ले सकता, लेकिन करीबी किसे कहेंगे। काम लेने के बाद कोई भी करीबी हो जाता है। थोड़ा विश्वास करना होगा। हां, मैं विश्वास दिलाती हूं मेरा कोई रिश्तेदार ठेका नहीं लेगा। बेहतर काम होना, यह अनिवार्य शर्त होनी चाहिए।
रात में अधिकांश स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं। सुधारने में हफ्तेभर लग जाते हैं, कारण क्या है?
मीनल: इसके लिए सजगता की जरूरत है। हर वार्ड में स्ट्रीट लाइट के मेंटनेंस के लिए कर्मचारी तय हैं। कई बार संसाधन की कमी के कारण समय पर काम नहीं हो पाते। हम बिजली की समस्या को दूर करने में कोई ठोस पहल करेंगे।
महिला जनप्रतिनिधियों के लिए आप आइडल हैं। पर कई महिला पार्षद बोल नहीं पातीं। सभा में सवाल नहीं पूछतीं?
मीनल: कई बार आरक्षण के कारण नेताओं को अपनी पत्नियों को चुनाव में उतारना पड़ता है। पिछले कार्यकाल में महिला एमआईसी सदस्य की जगह दूसरा सदस्य जवाब देता था। ऐसा नहीं होना चाहिए। महिला को मौका मिला है तो जिम्मेदारी समझना चाहिए। मैं स्कूल के जमाने से चुनाव लड़ते और जीतते आ रही हूं।
हर बार अध्ययन दौरे होते हैं, लेकिन बड़े शहरों का सिस्टम लागू नहीं हो पाता। आप जीतीं तो क्या होगा?
मीनल: जनप्रतिनिधियों की टीम इंदौर और चंडीगढ़ गई थी। एक दौरे में मैं भी थी। वहां हमने जो देखा, सीखा उसे लागू करने कई बार कमिश्नर से चर्चा की गई। कोई फायदा नहीं हुआ। इस बार हमारी ट्रिपल इंजन की सरकार बनेगी, तो हम शैक्षणिक भ्रमण में जाएँगे और वहां की अच्छी चीजों को अपने यहां लागू भी करेंगे।
क्या वजह है कि शहर के 10-15 वार्डों में सुविधाओं पर पूरा फोकस है, लेकिन आउटर में सड़क-नाली नहीं?
मीनल : नए जुड़े वार्डों में डेवलपमेंट होने में थोड़ा वक्त लगता है। एक दिक्कत यह है कि सभी वार्डों को विकास के लिए बराबर राशि दी जाती है। होना यह चाहिए कि जहां ज्यादा जरूरत है वहां अधिक और जहां कम जरूरत है वहां कम राशि दी जाए। इसकी पहल करेंगे।
ऐसी कौन सी बात, क्या वजह है कि लोग आपको महापौर चुनें?
मीनल: 15 साल से निगम में कांग्रेस की सरकार रही है। महापौर एजाज ढेबर के कार्यकाल में भ्रष्टाचार, कुशासन, परिवारवाद का बोलबाला था। जनता जानती है। इसलिए इस बार निगम में भाजपा की सरकार होगी और मैं भाजपा की प्रत्याशी हूं। राजनीति में लंबा अनुभव रहा है और पिछली बार पार्टी ने इसीलिए नेता प्रतिपक्ष भी बनाया। भाजपा और कांग्रेस ने 23 की जगह 26-26 महिला प्रत्याशी उतारे हैं। राजनीतिक मायने क्या हैं?
मीनल: हमारी पार्टी का फोकस महिला शक्ति है। हमारे यहां उम्मीदवारों की कमी नहीं, इसलिए 23 महिला आरक्षित वार्डों की तुलना में 26 को टिकट दिया। कांग्रेस ने 26 महिलाओं को उतारकर चकित किया है। वहां महिला कैंडिटेट नहीं, इसलिए एक गैर-राजनीतिक महिला को टिकट देना पड़ा।

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