गांव की मुख्य सड़क का चौड़ीकरण हुआ तो अतिक्रमण में आए ग्राम पंचायत भवन को तोड़ दिया गया। इसी पंचायत भवन के परिसर में इंदिरा गांधी प्रतिमा लगी थी। पंचायत ने प्रतिमा को हटाया और सुरक्षित रखवा दिया। इसके बावजूद उस समय जिला कांग्रेस ने विरोध जताया लेकिन इस मामले में स्थानीय कांग्रेस नेताओं को कोई आपत्ति नहीं थी। अब पंचायत ने इंदिरा गांधी की प्रतिमा को उसी जगह स्थापित कराया है, जहां इंदिरा सरकार में आपातकाल के दौरान जेल गए मीसाबंदियों के नाम से स्मारक बनाई गई हैं। मामला खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कालमुखी का है। यहां भाजपा समर्थित महिला सरपंच के फैसले का स्वागत पूरे गांव ने किया। इस गांव की सियासी एकजुटता अब मिसाल बनकर उभरी है। संघ, भाजपा की पृष्ठभूमि वाले कालमुखी गांव में पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न इंदिरा गांधी की प्रतिमा स्थापना के कार्यक्रम में पूरा गांव एकजुट हुआ। भाजपा-कांग्रेस के नेता भी मौजूद रहे। बता दें कि, ग्राम पंचायत ने अपने बजट से मुख्य चौराहे पर सिंहगढ़ नाम से एक किला बनवाया है। बाद में इसी किले को अटल लोकतंत्र स्मारक का नाम दिया और गांव के मीसाबंदियों के नाम का बोर्ड लगा दिया। एक तरफ मीसाबंदी, दूसरी तरफ इंदिरा गांधी की प्रतिमा खंडवा का कालमुखी गांव सियासत का गढ़ रहा है। कावेरी नदी के तट पर बसा आर्थिक रूप से संपन्न हैं। यहां खेती-किसानी का बड़ा व्यापार है। ग्राम पंचायत को भी हाट बाजार से राजस्व मिलता है। उसी राजस्व से ग्राम पंचायत ने सिंहगढ़ नाम से किला बनवाया। इस किले को बाद में मीसाबंदियों की स्मारक के रूप में पहचान दी। क्योंकि इसी गांव से इंदिरा गांधी की सरकार में आपातकाल के दौरान 13 लोग जेल गए थे। जो कि मध्यप्रदेश में आबादी के लिहाज से सबसे ज्यादा मीसाबंदी कालमुखी से थे। प्रतिमा अनावरण के दौरान मौजूद रहे दोनों पार्टी के नेता अतिक्रमण बताकर इंदिरा गांधी की प्रतिमा हटाने के दौरान सोशल मीडिया पर खूब बवाल हुआ। लेकिन गांव के विकास से जुड़ा मामला होने की वजह से कांग्रेस ने कोई आपत्ति नहीं ली। बल्कि आपसी सहमति के बाद प्रतिमा को हटवाया और कपड़ा ढंककर एक स्थान पर सुरक्षित रखवाया। अब भाजपा-कांग्रेस दोनों पार्टी के नेताओं ने प्रतिमा अनावरण के दौरान मौजूदगी दिखाई। पूर्व कांग्रेस नेता भगवानसिंह पटेल, सावन गुर्जर, किशन परमार और भाजपा नेता व जिला विकास सलाहकार समिति सदस्य पंकज गुप्ता, सुभाष गुप्ता, चंद्रप्रकाश पंवार मौजूद थे। सियासत ऐसी कि सरपंच-पंच चुनाव भी पार्टी आधारित कालमुखी गांव राजनीतिक रूप से इतना समृद्ध है कि यहां सत्ता और विपक्ष दोनों मजबूत है। इस गांव में सरपंच और पंचों का चुनाव भी व्यक्ति आधारित नहीं बल्कि पार्टी आधारित है। दोनों पार्टियां सरपंच और वार्डों में पंच के लिए प्रत्याशी अधिकृत करती है। बल्कि अन्य गांवों में ऐसा सिर्फ जिला पंचायत और जनपद पंचायत सदस्यों के निर्वाचन में होता है। खास बात यह है कि राजनीतिक समृद्ध इस गांव में कभी सियासी विवाद नहीं हुआ। विवाद की स्थिति बनती है तो उसे आपसी सहमति से सुलझा लिया जाता हैं। जिले का पहला गांव, जो आरओ का पानी देता है कालमुखी ग्राम पंचायत को जिले और प्रदेश में मॉडल पंचायत के रूप में जाना जाता है। यह जिले का पहला गांव है, जो इतनी बड़ी आबादी को आरओ का पानी देता है। मुख्य चौराहे पर स्थित सिंहगढ़ किला परिसर में ही ग्राम पंचायत ने आरओ फिल्टर प्लांट लगा रखा है। ग्रामीणों को पानी के लिए एटीएम कार्ड दिए गए है, जिसे रिचार्ज कराकर ग्रामीण आरओ का शुद्व पानी लेते है। यह नवाचार सरपंच मनीषा वर्मा ने किया है। उनके पति गोविंद वर्मा पूर्व में जिला पंचायत सदस्य और भाजपा मंडल अध्यक्ष रह चुके है। ये खबर भी पढ़े- कालमुखी पंचायत ने इंदिरा गांधी की प्रतिमा हटाई:कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी, सरपंच बोलीं- रास्ते में बाधक दी, नई जगह देंगे


