मुकंदरा रिजर्व में तीन दिवसीय टाइगर टेल्स:वन्यजीव प्रेमी घाटी में घूमे, विशेषज्ञों ने सिखाए जंगल के ‘कायदे, शिकार की रणनीतियां

मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के शेलजर नेचर कैंप में तीन दिवसीय टाइगर टेल्स का आयोजन किया जा रहा है। पगमार्क फाउंडेशन, मुकंदरा, रामगढ़ टाइगर संस्था और मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘टाइगर टेल्स’ बूटकैंप में अलग अलग जगहों से आए वन्यजीव प्रेमियों और छात्रों ने हिस्सा लिया। कैम्प में पहले दिन युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों ने मुकंदरा के दुर्गम और अति-संवेदनशील ‘घाटी क्षेत्र’ का भ्रमण किया। घने जंगलों, जैव-विविधता और बाघों के प्राकृतिक आवास को अपनी आँखों से देखा और उसे समझने का प्रयास किया।
​कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में रणथंभौर टाइगर रिजर्व के पूर्व डीसीएफ और वन्यजीव विशेषज्ञ दौलत सिंह शक्तावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने ‘टाइगर इकोलॉजी’ पर अपना व्याख्यान देते हुए बाघों के व्यवहार की बारीकियों को समझाया। शक्तावत ने बताया कि बाघ जंगल में किस प्रकार अपने क्षेत्र का निर्माण करते हैं, शिकार की रणनीतियां क्या होती हैं, और एक ‘टाइगर ट्रैकर’ कैसे जंगल के संकेतों को पढ़ता है। कार्यक्रम में अलग अलग हिस्सों से 25 से 30 प्रतिभागी शामिल हुए है। इनमें 10 से 15 कोटा से है। पगमार्क फाउंडेशन के अध्यक्ष देवव्रत सिंह हाड़ा ने बताया कि मुकंदरा का संरक्षण केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के वन्यजीव प्रेमियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्थानीय समुदाय और युवाओं के बीच ‘सह-अस्तित्व’ की भावना जगाने पर जोर दिया। ​मुकंदरा रामगढ़ टाइगर संस्था के कौशल बंसल ने कहा कि इस बूटकैंप का उद्देश्य विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं को एक मंच पर लाना है, ताकि वे मुकंदरा की चुनौतियों और खूबियों को समझकर इसके ब्रांड एंबेसडर बन सकें। ​कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कृष्णेंद्र नामा ने प्रतिभागियों को बूटकैंप की रूपरेखा समझाई और जंगल में वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अगले दो दिनों में प्रतिभागी ‘साइन सर्वे’ और पक्षी दर्शन जैसी गतिविधियों में भी भाग लेंगे। ​इस बूटकैंप में जंगल सफारी, कैंप फायर और स्टार गेजिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को प्रकृति से जोड़ा गया।

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