प्रदेश में लंबित राजस्व मामलों के लगातार बढ़ने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सख्त तेवर अपनाए। कलेक्टर्स कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को दो टूक शब्दों में कहा कि अब पेशी पर पेशी का दौर खत्म हो। सभी राजस्व मामलों का निर्धारित समय सीमा के भीतर निपटारा होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार पेशी पर बुलाने से लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ समय भी बर्बाद होता है। इससे सरकारी सिस्टम पर से लोगों का भरोसा भी कम होता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पेशी में कमी लाएं और प्रकरणों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार अब राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रत्येक अधिकारी सुनिश्चित करें कि मामलों का निपटारा तेजी से और न्यायसंगत ढंग से हो। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए नामांतरण, अविवादित व विवादित बंटवारे, अभिलेख दुरूस्ती, त्रुटि सुधार, भू-अर्जन, सीमांकन, और डायवर्सन से संबंधित प्रकरणों की जिलेवार समीक्षा की। कलेक्टर्स कांफ्रेंस : बढ़ते लंबित राजस्व प्रकरणों पर मुख्यमंत्री की कलेक्टरों को दो टूक छत्तीसगढ़ में 1 लाख से अधिक मामले लंबित, 41538 छह माह से 5 साल तक के राज्य में फिलहाल एक लाख से अधिक राजस्व मामले सालों से पेंडिंग हैं। कार्रवाई के नाम पर इनमें पेशी पर पेशी का दौर चल रहा है। इसमें 41538 मामले 6 माह से लेकर 5 साल तक पुराने हैं। सबसे ज्यादा पेंडिग 9802 मामले दुर्ग जिले में हैं। वहीं बिलासपुर में 6374, रायपुर में 6264, बलरामपुर-रामानुजगंज में 5645 और सरगुजा में 5029 मामले लंबित हैं। राज्य में लंबित राजस्व मामलों की स्थिति {5 साल से लंबित – 2291 मामले {3-5 साल पुराने – 4026 {1- 3 साल पुराने – 18846 {6 माह से 1 साल पुराने- 16375 {0- 6 माह पुराने – 68459 { कुल मामले – 109997 ई-कोर्ट में दर्ज करें सभी राजस्व मामले मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने सभी राजस्व प्रकरणों को ई-कोर्ट में दर्ज करने के आदेश दिए। ताकि मॉनिटरिंग और ट्रैकिंग आसानी से हो सके। उन्होंने रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण और त्रुटि सुधार के मामलों पर भी विशेष ध्यान देने के लिए कहा। साथ ही रिकार्ड दुरुस्त करने के लिए तहसील स्तर पर पटवारियों के जरिए विशेष अभियान चलाने को कहा। छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव 25 सप्ताह तक चलेगा छत्तीसगढ़ निर्माण की 25वीं वर्षगांठ मनाने को लेकर भी कलेक्टरों को निर्देश दिया गया। 15 अगस्त से शुरू हुआ रजत महोत्सव 25 सप्ताह तक चलेगा। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से कहा कि सभी अपने-अपने क्षेत्र में आयोजन कर रजत महोत्सव को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं। कार्यक्रमों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जाए। 17 सितंबर से लेकर 2 अक्टूबर तक राज्य में ‘सेवा पखवाड़ा’ मनाया जाएगा।


