मप्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ” मुख्यमंत्री सीखो कमाओ’ का इस साल ऑडिट होगा। करीब दो साल पहले शुरू की गई इस योजना में अभी तक कुल 9.36 लाख युवाओं ने पंजीयन करवाया है, जिसमें से महज 3 फीसदी को ही ज्वाइन करवाया जा सका है। इनमें भी सबसे अधिक कॉल सेंटर में काम करने वाले युवा हैं, जबकि बड़े रोजगार देने वाले दूसरे क्षेत्र जैसे खनिज, प्रोडक्शन, उत्पादन व निर्माण, बैंकिंग, रिटेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, टैक्सटाइल, स्वास्थ्य सेवा समेत करीब 20 क्षेत्र में मांग के बाद भी इनमें काम करने वाले युवा नहीं मिल पा रहे हैं। हाल यह है कि करीब 25 हजार प्रतिष्ठानों ने नौकरी देने के लिए पंजीयन करवाया, लेकिन काम सिर्फ 8 हजार ने ही दिया है।
इस काम में एक गड़बड़ी यह भी सामने आई कि साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए युवाओं में से करीब डेढ़ हजार ने बताए गए काम नहीं मिलने से अनुबंध रद्द कर दिया। इस अंतर को देखते हुए तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग इसकी समीक्षा करेगा और सुधार करेगा। इसके लिए विभागीय मंत्री ने खुद अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वे देखें- क्यों बच्चे इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इसी माह इसको लेकर एक बैठक विभाग में होने वाली है। युवा नहीं दिखा रहे दिलचस्पी सही ढंग से मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण प्रतिष्ठानों में रिक्त पद होने के बाद भी युवा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इनमें मुख्य क्षेत्र, उनमें मांग और मौजूदा काम करने वालों की संख्या। सभी युवाओं को लाभ मिले व अंतर कम हो, समीक्षा के बाद सुधार करेंगे योजना के तहत सभी वर्ग के युवाओं को लाभ मिले और अंतर कम हो, इसके लिए हम समीक्षा करेंगे। उसमें देखेंगे कि आखिर बड़े क्षेत्रों में युवा क्यों नहीं हैं। समीक्षा के बाद सुधार कार्य शुरू होगा। गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग योजना के बारे में जानिए… शिवराज सरकार में अगस्त 2023 में यह योजना शुरू हुई थी और इसमें 18 से 29 साल उम्र तक के युवक-युवतियों को शामिल किया गया है। 12वीं पास, आईटीआई या यूजी-पीजी करने वाले युवाओं को इसमें प्राथमिकता दी गई है। इनको कोई नौकरी देगा तो 12वीं पास को 8 हजार रुपए, आईटीआई को 8500 रुपए, डिप्लोमा धारी को 9 हजार व यूजी-पीजी या अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त युवा को 10 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है।


