मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा:झारखंड में पेसा नियमावली लागू, अब ग्रामीणों को मिलेंगे अधिकार

झारखंड सरकार ने राज्य में पेसा नियमावली लागू कर दी है। अब ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके अधिकार मिलेंगे। यह कानून हमारे जल-जंगल और जमीन की सुरक्षा का आधार है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने संसाधनों पर खुद निर्णय ले सकेंगे। स्वशासन की भावना भी सशक्त होगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पेसा कानून हमारे पूर्वजों के संघर्ष और अधिकार भावना का प्रतीक है, जो ग्राम स्वराज के वास्तविक स्वरूप को साकार करेगा। सरकार का प्रयास होगा कि पेसा कानून से जुड़ी जानकारी गांव-गांव तक पहुंचे। इसके लिए राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि हर ग्रामीण अपने अधिकारों को जान सकें और उसका उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि झारखंड के 25 साल पूरे हो चुके हैं। अब युवा झारखंड विकास की नई राह पर बढ़ रहा है। हमारा संकल्प है कि आने वाले सालों में झारखंड देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो। इसके लिए सभी वर्ग के सहयोग से हम आगे बढ़ेंगे। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है किन जिलों में लागू होगी रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा. सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसांवा, लातेहार, साहेबगंज, दुमका, पाकुड़ और जामताड़ा अनुसूचित जिला घोषित हैं। इसके अलावा पलामू के सतबरवा प्रखंड का रबदा व बकोरिया पंचायत, गढ़वा का भंडरिया प्रखंड और गोड्डा का सुंदर पहाड़ी व बोआरीजोर प्रखंड अनुसूचित क्षेत्र में हैं। यहां यह नियमावली लागू होगी। खनन पर ग्राम सभा की सहमति अनिवर्य अनुसूचित क्षेत्र में किसी भी विकास परियोजना, भूमि उपयोग, खनन, जल संसाधन प्रबंधन आदि पर ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य होगी। सूदखोरी और मद्यपान निषेध पर भी ग्राम सभा की मर्जी चलेगी। सूद का रेट भी ग्राम सभा से ही तय होगा। शराब की दुकान खोलने की अनुमति भी ग्रामसभा से लेनी होगी। अब ग्राम सभा को अधिक अधिकार और नियंत्रण मिलेगा। ग्राम सभा ही तय करेगी कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग कैसे और किसके लिए होगा। बालू घाटों के आवंटन पर से रोक हटा सकता है हाईकोर्ट पेसा कानून लागू नहीं करने पर हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2025 से बालू घाट और अन्य लघु ​खनिजों के आवंटन पर रोक लगा रखी है। अब 13 जनवरी को सुनवाई है। उस दिन इससे रोक हट सकती है। भास्कर इनसाइट – ये 2 बड़े बदलाव हुए 1. एक राजस्व ग्राम में एक से अधिक ग्रामसभा हो सकेगी नियमावली के प्रारूप के अध्याय-2 में प्रस्ताव था कि एक राजस्व ग्राम में एक ग्रामसभा होगी। कल्याण मंत्री ने इस पर आपत्ति जताई। लेकिन ​इस आपत्ति को दरकिनार कर नियमावली का प्रारूप कैबिनेट को भेज दिया गया। कैबिनेट ने इसमें बदलाव कर दिया। अब एक राजस्व ग्राम में एक ही ग्राम सभा होगी। लेकिन अगर समुदाय को लगता है कि परंपरा के हिसाब से एक से अधिक ग्रामसभा होनी चाहिए तो उसे किया जा सकता है। 2. ग्रामसभा को 2000 रुपए तक ही जुर्माना लगाने का अधिकार अध्याय-8 में प्रस्ताव था कि ग्रामसभा ​10 हजार रुपए तक का जुर्माना लगा सकती है। यह राशि ग्रामसभा कोष में जमा होगी। लेकिन कई मंत्रियों को इस पर आपत्ति थी। कैबिनेट में इस पर चर्चा हुई। कहा गया कि कई गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे इतनी बड़ी राशि दे सके। इसलिए जुर्माने की राशि घटाकर अधिकतम दो हजार रुपए करना चाहिए। इसके बाद जुर्माना राशि घटाकर दो हजार रुपए कर दी गई।

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