मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्वी क्षेत्रीय परिषद के सम्मेलन में कहा कि उग्रवाद की समस्या से निपटना केवल राज्य सरकार के लिए ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार के पास जितने भी संसाधन उपलब्ध हैं, उनका उपयोग इस कार्य के लिए किया जा रहा है। केंद्रीय बलों की प्रतिनियुक्ति से केंद्र सरकार से भी हमें पर्याप्त सहयोग मिल रहा है। परंतु इस प्रतिनियुक्ति के एवज में राज्य सरकार को एक बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ता है। अगर केंद्र सरकार यह मानती है कि उग्रवाद को समाप्त करना केंद्र तथा राज्य सरकार की संयुक्त जिम्मेवारी है, तो ऐसी परिस्थिति में केंद्रीय बलों की प्रतिनियुक्ति के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार से राशि के भुगतान की मांग नहीं की जानी चाहिए। बैठक में राजस्व मंत्री दिपक बिरुआ, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अलका तिवारी, विकास आयुक्त अविनाश कुमार, स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह, गृह एवं कैबिनेट की प्रधान सचिव वंदना दादेल, पथ निर्माण सचिव सुनील कुमार व डीजीपी अनुराग गुप्ता आदि बैठक में शामिल थे। रामरेखा धाम को रामायण सर्किट से जोड़ने की मांग : सीएम राज्य की आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ाने पर जोर दिया। डीएमएफटी नीति में सुधार और पीएसयू क्षेत्रों में स्थानीयों को प्राथमिकता देने पर बल दिया। साथ ही बंद पड़ी खदानों के सुरक्षित बंदीकरण के लिए स्पष्ट नीति की आवश्यकता जताई। उन्होंने रामरेखा धाम को रामायण सर्किट और राज्य के बौद्ध स्थलों को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग भी रखी। सीएम ने राज्य में रेलवे नेटवर्क के विस्तार और अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने का भी अनुरोध किया। जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना में मिले सहायोग सीएम हेमंत सोरेन ने जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भारत सरकार से आवश्यक आर्थिक सहयोग की अपेक्षा जताई है। सीएम ने कहा कि झारखंड के आदिवासी बाहुल्य संथाल परगना क्षेत्र के विकास को गति देने हेतु राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर स्थित साहिबगंज मल्टी मॉडल टर्मिनल (एमएमटी) को राजधानी रांची से जोड़ने के लिए रांची-साहिबगंज एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेस-वे का निर्माण भी कराया जाए। उन्होंने एसटी, एसटी, ओबीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं के विस्तार और केंद्र से वित्तीय अनुदान की व्यवस्था करने की मांग की।


