मुनि सुव्रतनाथ मंदिर में हुआ आचार्य विमल सागर विधान

बांसवाड़ा| बाहुबली कॉलोनी स्थित मुनि सुव्रतनाथ मंदिर में मंगलवार को आचार्य विमल सागर जी महाराज का समाधि दिवस मनाया। आर्यिका सम्मेद शिखरमति माताजी ने अपने दीक्षा गुरु आचार्य विमल सागर जी के बारे में बताया की उनकी समाधि 1995 में सम्मेद शिखर तीर्थ क्षेत्र पर हुई थी। उन्होंने प्रवचन में कहा कि वे अपने गुरु के उपकारों को कभी नहीं न भूला सकती, जिन्होंने मेरा जीवन बना दिया। मुनि सुव्रतनाथ सेवा संस्थान के प्रवक्ता अशोक कोठिया ने बताया कि आचार्य विमल सागर जी की खड़गासन श्वेत पाषाण प्रतिमा मंदिर में स्थापित है। सुबह से ही दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रही। इस अवसर पर भगवान का अभिषेक और शांतिधारा के पुण्यार्जक परिवार हुकमीचंद कासलीवाल जोधपुर, चंदूलाल रजावत, उषा, अनमोल, रचित, जैनी, प्रियांशी प्रभव, राजेंद्र दोशी, बलभद्र जगावत रहें। मंदिर में आचार्य विमल सागर विधान में आचार्य के छत्तीस गुणों के अर्घ्य अर्पित किए। विधान के पुण्यार्जक चंदू लाल,उषा रजावत परिवार रहें। अयोजन में परेश नायक, महावीर मोरिया, चंदूलाल रजावत, विकास जैन छत्तीसगढ़, प्रिंस जैन, धनेंद्र सेठ आदि उपस्थित रहे।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *