छत्तीसगढ़ नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन के बैनर तले मेकाहारा में नर्सिंग स्टाफ ने प्रोटेस्ट शुरू कर दिया है। नर्स अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध प्रोटेस्ट कर रही हैं। संघ का कहना है कि बीते 10 वर्षों से मांगें लंबित हैं। विभागीय मंत्री ने 4 जुलाई 2024 को एक माह के भीतर कैबिनेट में प्रस्ताव रखकर निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन 1 वर्ष 5 माह बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नर्सिंग स्टाफ में भारी असंतोष है। पढ़ाई के लिए अध्ययन अवकाश और नियमित वेतन की मांग संघ ने सत्र 2025-26 के लिए रायपुर, बिलासपुर और अंबिकापुर मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ को अध्ययन अवकाश की अनुमति देने और इस अवधि में नियमित वेतन भुगतान की मांग की है। समयमान वेतनमान और पदोन्नति पर भी सवाल संघ का कहना है कि शासन के नियमानुसार 10, 20 और 30 वर्ष पूर्ण होने पर समयमान वेतनमान दिया जाना चाहिए, लेकिन 7 से 8 साल अतिरिक्त बीतने के बाद भी आदेश लंबित हैं। संघ ने ब्याज सहित आदेश जारी करने की मांग की है। इसके साथ ही— अस्पतालों में झूला घर, कैश-लेस इलाज और परिजनों की सुविधा की मांग संघ ने सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में— ग्रेड पे और संविदा नर्सों को लेकर प्रमुख मांग संघ ने ग्रेड पे में संशोधन की भी मांग रखी है— या फिर शासन की ओर से गठित 20 सूत्रीय कमेटी की अनुशंसाओं को आंशिक संशोधन के साथ लागू करने की मांग की गई है। इसके अलावा, रिक्त नियमित पदों पर पहले से कार्यरत संविदा और कलेक्टर दर की नर्सों को समायोजित करने या मध्यप्रदेश की तर्ज पर समान काम–समान वेतन लागू करने की मांग भी उठाई गई है। कलेक्टर दर पर कार्यरत स्टाफ नर्स को उच्च कुशल श्रेणी में रखकर करीब 14 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन देने की मांग की गई है। चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान संघ ने बताया कि दो माह पहले भी ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते अब चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया गया है— संघ ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश और स्थानीय मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो नए साल में अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा।


