मेटाडोर की चपेट में आया युवक, मौत:खैरागढ़ में दो बाइक की टक्कर के बाद हुआ हादसा,7 दिन में दूसरी मौत, बाईपास की मांग तेज

खैरागढ़ में सांस्कृतिक भवन के पास रविवार को दो बाइक सवार आपस में टकराकर सड़क पर गिर गए। इसी दौरान एक युवक धान से भरे मेटाडोर की चपेट में आ गया। युवक के सिर पर गंभीर चोट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मेटाडोर चालक फरार हो गया। पुलिस चालक की तलाश कर रही है। मृतक की पहचान अभी नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि वह राजनांदगांव के भेड़िकला गांव का रहने वाला था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। इससे पहले आमलीपारा में भी एक हादसा हुआ था। धान से लदे ट्रक ने सड़क पार कर रहे एक व्यक्ति को कुचल दिया था। इस हादसे में व्यक्ति का शरीर दो टुकड़ों में बंट गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। 12 वर्षों से बाईपास अधूरा, हादसों को दे रहा दावत खैरागढ़ में सोनसरार से किसान राइस मिल तक बाईपास सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन पुलिया अधूरी होने के कारण यह सड़क अब तक चालू नहीं हो पाई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिया का निर्माण पूरा हो जाए, तो भारी वाहनों को शहर के अंदर प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है। लेकिन पुलिया अधूरी होने के कारण भारी वाहन अब भी शहर के मुख्य मार्गों से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। शहर के व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बाईपास का अधूरा निर्माण अब लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। उनका कहना है कि बाईपास चालू नहीं होने से भारी वाहन शहर के अंदर से गुजर रहे हैं, जिससे भीड़-भाड़ और दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। यदि पुलिया का निर्माण पूरा हो जाता, तो भारी वाहन बाईपास से ही निकलते और शहर की सड़कों पर दबाव कम होता। बाईपास पुलिया निर्माण पूरा करने की मांग हर साल शहर के अंदर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान जा रही है, लेकिन प्रशासन इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द बाईपास पुलिया निर्माण पूरा कराने की मांग की है, ताकि शहर की सड़कें सुरक्षित हो सकें और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। खैरागढ़ में बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है। प्रशासन की लापरवाही और बाईपास सड़क का अधूरा निर्माण लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। आखिर कब तक प्रशासन इन दुर्घटनाओं की अनदेखी करता रहेगा? कब तक निर्दोष लोग हादसों में जान गंवाते रहेंगे? क्या प्रशासन अब भी कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर ऐसे ही लोगों की जान जाती रहेगी?

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