मौसम के बदलते मिजाज और बाजार भाव के लगातार उतार-चढ़ाव ने कई किसानों को परेशान किया है, लेकिन सीतामऊ तहसील के सेमलखेड़ा के प्रगतिशील किसान श्याम धनगर ने इससे नया रास्ता खोज निकाला। पारंपरिक फसलों में लगातार नुकसान देखने के बाद उन्होंने अपने खेत को पूरी तरह औषधीय फसलों के लिए समर्पित कर दिया। आज सर्पगंधा, अंबाड़ी और चिया बीज जैसी फसलों से उनकी खेती न केवल लाभदायक बनी है, बल्कि लागत भी काफी कम हो गई है। इसके अलावा किसान ने अतिरिक्त आय के लिए खेत की मेड़ पर सहजन के पेड़ लगा रखे हैं, ताकि इनकी पत्तियों से आर्थिक लाभ हो सके।
सिर्फ 10वीं तक पढ़ाई करने वाले श्याम धनगर ने जिज्ञासा और प्रयोगधर्मिता के बल पर अपनी भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने का अनोखा तरीका अपनाया है। वे खेत में बायोमास का उपयोग करते हैं। इसके लिए आसपास के किसानों से भूसा खरीदकर खेत में फैलाते हैं, फिर पानी छोड़कर उसे गलने देते हैं। बुवाई से पहले यह बायोमास सड़कर मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाता है और खेत की उर्वरा शक्ति लगभग दो गुना तक बढ़ा देता है। श्याम बताते हैं कि यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक है और मिट्टी की सेहत लंबे समय तक बनाए रखता है। उन्होंने खेत में वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद और प्राकृतिक खाद बनाने की भी व्यवस्था की है, ताकि बाहरी रसायनों पर निर्भरता खत्म हो और मिट्टी का कार्बन बढ़ सके। उनका कहना है कि औषधीय फसलों पर मौसम का उतना असर नहीं होता, जितना पारंपरिक फसलों पर देखने को मिलता है। रोग भी कम लगते हैं और उत्पादन लगभग स्थिर रहता है।
श्यामलाल धनगर 2018 तक गेहूं, चना और सोयाबीन जैसी फसलें लेते थे। लेकिन औषधीय पौधों का अध्ययन करने और कुछ प्रयोग करने के बाद उन्हें पता चला कि इन फसलों में न केवल जोखिम कम है, बल्कि बाजार भी स्थिर है। औषधीय फसलों में वे रासायनिक खाद का प्रयोग बहुत कम करते हैं, जिससे लागत घटती है और मिट्टी भी सुरक्षित रहती है। औषधीय खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। जहां पहले पारंपरिक फसलों में खर्च अधिक और मुनाफा कम था, वहीं अब कम लागत में अधिक आय हो रही है। उनकी पहल को देखकर आसपास के किसान भी औषधीय खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं। श्याम धनगर मानते हैं कि यदि किसान प्रयोग करने का साहस दिखाएं और मिट्टी की सेहत पर ध्यान दें तो खेती फिर से लाभ का धंधा बन सकती है। धनगर का कहना है कि खेती में नवाचार, प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग और वैकल्पिक फसलों का चयन किसान को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकता है।


