मेरी योजना, कितनी हुई मेरी:रोज नहीं उठता कूड़ा, सफाई भी नियमित नहीं, गेल को 50% ही गीला कूड़ा मिल रहा

दो करोड़ रु. नालियों की सफाई पर खर्च हो रहा है झारखंड बनने के बाद नगर निगम का पहला चुनाव 2008 में हुआ था। पहली निगम बोर्ड ने 2011 में पहली बार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया था। एटूजेड कंपनी को कूड़ा उठाव और झिरी में डंप करने की जिम्मेदारी दी गई थी। कूड़ा से बिजली का उत्पादन भी करना था, लेकिन यह कवायद मात्र 30 माह चली। शहर की सफाई पर कोई खास असर नहीं हुआ। इसके बाद नगर निगम का चुनाव दो बार हुआ। दोनों बार की बोर्ड ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लागू कराया। नई कंपनी आई, लेकिन एक भी कोई भी कंपनी सफल नहीं हुई। इसके बाद निगम ने पिछले वर्ष स्वच्छता कॉर्पोरेशन नामक कंपनी को सफाई का ठेका दिया। शहर के 53 वार्डों में कूड़ा उठाव, ढुलाई और नालियों की सफाई पर निगम हरेक माह करीब 6 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। सालाना करीब 72 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। बावजूद शहर की सड़कों, मोहल्लों और नालियों में कचरा फैला है। नगर निगम की कागजी व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच काफी अंतर है। ऐसे में निगम की नई बोर्ड के सामने शहर को साफ-स्वच्छ रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी। सबसे खराब स्थिति गली-मुहल्लों की है,क्योंकि मुहल्लों में सफाई हो रही है या नहीं, यह देखने वाला भी कोई नहीं। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है गीला कचरा कम मिलने से गेल इंडिया को हो रही परेशानी शहर से निकलने वाले कचरा से बायो गैस और खाद बनाने के लिए झिरी में गेल इंडिया ने प्रोसेसिंग प्लांट लगाया है। प्लांट को चलाने के लिए रोज 150 मीट्रिक टन गीला कचरा की जरूरत है। पर, निगम मुश्किल से 60- 70 मीट्रिक टन ही गीला कचरा दे रहा है। इस संबंध में गेल इंडिया ने निगम को कई बार पत्र लिखकर गीला कचरा उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। रोजाना 600 मीट्रिक टन कचरा निकल रहा, उठाव 70 % ही स्वच्छता कॉर्पोरेशन की माने तो शहर में करीब तीन लाख घर हैं। यहां से रोज करीब 600 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। कंपनी का दावा है कि हरेक घर से रोज कचरे क उठाव हो रहा है। जबकि, सच्चाई है कि मात्र 60-70% ही कूड़ा उठता है। शहर में जगह-जगह बने डंप जोन इसकी पुष्टि करते हैं। घरों से कूड़े का उठाव होगा तो मुहल्लों में नाली व सड़क पर कूड़े का ढेर नहीं लगेगा। नालियों की सफाई रोस्टर पर, अमल में बरती जा रही लापरवाही शहर की नालियों की सफाई के लिए नगर निगम ने रोस्टर बना रखा है। सभी 53 वार्डों में रोस्टर के अनुसार नालियों की सफाई होनी चाहिए, लेकिन अधिकांश वार्डों में यह रोस्टर सिर्फ फाइलों तक सीमित है। मुख्य सड़कों की अधिकतर नालियां स्लैब से ढकी है, इसलिए उसकी सफाई मशीन से की जाती है। लेकिन मुहल्लों की नालियों की सफाई मैनुअल की जाती है। बड़ा सवाल घरों में आरएफआईडी चिप नहीं लगा, मॉनिटरिंग कैसे हो रही नगर निगम ने स्वच्छता कॉर्पोरेशन के माध्यम से सभी घरों में आरएफआईडी चीप लगाने का दावा किया है। इससे समय पर सफाई की मॉनिटरिंग होगी। लेकिन सच्चाई यह है कि अभी भी सभी घरों में चीप नहीं लगी है। इसके बावजूद निगम द्वारा बहाल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट कंपनी आरसीयूएस शत प्रतिशत कूड़ा उठाव की रिपोर्ट करती है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब आरएफआईडी लगा नहीं, सभी घरों से कूड़ा नहीं उठ रहा फिर भी शत प्रतिशत कूड़ा उठाव का दावा किस आधार पर किया जाता है।

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