वो दौर जब मोहब्बत खतों में लिखी जाती थी और प्यार का इजहार गानों में किया जाता था, तब परदे पर एक मुस्कुराता चेहरा आया, नाम है धर्मेंद्र। उनकी आंखों की चमक, उनकी सादगी और उनके गानों का जादू बस दिल में उतर जाता था। धर्मेंद्र के गाने सिर्फ सुने नहीं गए, उन्हें महसूस किया गया, जिया गया और उन पर थिरका गया, जिन्हें कई पीढ़ियां सदियों तक याद रखेंगी। यह कहानी उन्हीं सुरों की महक की है, जो आज भी “पल पल दिल के पास” धड़कती है, जिन सुरों ने थिरकना सिखाया और दोस्ती की नई परिभाषा बनाई-


