मोक्षदा एकादशी: पापों के नाश और मोक्ष प्राप्ति का पावन अवसर

भास्कर न्यूज | जामताड़ा अगहन मास में आने वाली मोक्षदा एकादशी को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। इस वर्ष मोक्षदा एकादशी का शुभ समय 13 अगहन, 30 नवंबर रविवार सुबह 04:04:04 से प्रारंभ होकर 14 अगहन, 1 दिसंबर सोमवार दोपहर 02:15:12 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एकादशी केवल पापों के नाश का ही नहीं, बल्कि मोक्ष प्राप्ति का भी मार्ग प्रशस्त करती है। भगवान श्रीविष्णु को समर्पित इस पावन तिथि पर भक्त उपवास रखते हैं और रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन में लीन होते हैं।पौरोहित्य परंपरा में यह एकादशी गीता जयंती के रूप में भी मानी गई है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इसी कारण इस तिथि पर गीता पाठ, दान-पुण्य, दीपदान तथा विशिष्ट पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन किया गया उपवास न केवल साधक को पुण्य प्रदान करता है बल्कि उसके पूर्वजों को भी शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।उपवास करने वाले भक्तों के लिए एकादशी पारणा का समय भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष पारणा का शुभ मुहूर्त 15 अगहन, 2 दिसम्बर मंगलवार सुबह 09:38:50 बजे के अंदर निर्धारित किया गया है। मान्यता है कि एकादशी व्रत का पारणा उचित समय पर न करने से व्रत का फल अपूर्ण माना जाता है। आचार्यों काजल चक्रवर्ती का मानना है कि इस पावन एकादशी पर सत्य, संयम और सदाचार का पालन आवश्यक है। स्वच्छता, ब्रह्मचर्य और ईश्वर-भक्ति के साथ व्रत रखने से भक्तों को हर प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-शांति का वास होता है। मोक्ष की कामना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह तिथि अत्यंत कल्याणकारी मानी गई है। यह व्रत भगवान विष्णु की पूजा और श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ के लिए विशेष माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इस व्रत का पुण्य स्वयं के पापों से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ पितरों को मोक्ष दिलाने में भी सहायक होता है। मोक्षदा एकादशी का अर्थ है ‘मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी’, जो जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाती है।

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