कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर पैर तक जाने वाला तेज दर्द यानी साइटिका अब शहर में आम समस्या बन गई है। सरकारी अस्पतालों से लेकर निजी क्लीनिकों तक ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जो चलने, बैठने व लंबे समय तक खड़े रहने में असहज महसूस कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार बदलती लाइफस्टाइल, गलत पोस्चर, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी इसकी बड़ी वजह बन रही है। उम्रदराजों की समस्या से अब युवा व वर्किंग प्रोफेशनल्स भी चपेट में आ रहे हैं। एक स्पेशलिस्ट के पास ही महीने में 40-50 नए केस सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक साइटिका तब होता है, जब रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में मौजूद साइटिक नर्व पर दबाव पड़ता है। कई मरीज दर्द निवारक दवाओं से राहत पाने की कोशिश करते हैं, जिससे असली समस्या छिपी रह जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर जांच सुविधाओं के कारण अब पहले छिपे रहे साइटिका के मामले भी सामने आ रहे हैं। समय पर फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल में बदलाव से बचाव संभव है। बैठकर काम करने वालों के लिए नियम कमर से पैर तक जाने वाला दर्द गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है, जिसे सायटिका कहा जाता है। यदि कमर दर्द के साथ पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी या चलने में परेशानी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार बैठकर काम करने वालों को हर 15 मिनट बाद खड़े होकर बैठना चाहिए और 40 से 45 मिनट में ऑफिस का एक चक्कर लगाना चाहिए। वहीं, लगातार खड़े रहने वालों को पैरों के नीचे करीब 4 इंच का पटड़ा रखकर कभी दायां तो कभी बायां पैर उस पर रखना चाहिए। ऐसी सतह पर बैठने से बचना चाहिए जो नीचे धंसती हो। मोटापे, नियमित स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज, सही पोस्चर और समय पर जांच से सायटिका को कंट्रोल में रखा जा सकता है। साइटिका अब युवाओं और वर्किंग प्रोफेशनल्स में भी बढ़ रहा, एक डॉक्टर के पास ही माह में 50 नए केस डॉ सोम गुप्ता, फिजियोथेरेपिस्ट केस 1 : ऑफिस में लंबे समय तक बैठना बना दर्द की वजह : आईटी कंपनी में कार्यरत 32 साल के प्रोफेशनल को शुरू में हल्का कमर दर्द हुआ। घंटों लैपटॉप पर झुकने की वजह से कुछ महीनों बाद दर्द दाएं पैर तक पहुंच गया। चलने में झनझनाहट और सुन्नपन बढ़ने लगा। जब जांच कराई तो साइटिका की पुष्टि हुई। समय रहते इलाज शुरू होने से उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है। केस 2 : घर के काम में झुकना पड़ा भारी : 45 साल की हाउसवाइफ लंबे समय से कमर दर्द से जूझ रही थीं। रोजाना झाड़ू-पोंछा, कपड़े धोना और झुककर काम करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। धीरे-धीरे दर्द जांघ और पैर तक जाने लगा। कई दिनों तक दर्द सहने के बाद जब चलना और सोना मुश्किल हुआ। जांच में पता चला कि नस पर दबाव बढ़ गया है, जिससे साइटिका की समस्या हो गई। केस 3 : ड्राइविंग जॉब ने बढ़ाई परेशानी : एक निजी कंपनी में ड्राइवर 40 साल के व्यक्ति को लंबे समय तक गाड़ी चलाने के कारण कमर में दर्द रहने लगा। शुरुआत में दर्द हल्का था, लेकिन समय के साथ यह पैर तक फैल गया। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार एक ही पोजिशन में बैठकर ड्राइविंग करने से रीढ़ पर दबाव पड़ता है। केस 4 : युवक का बढ़ता स्क्रीन टाइम सायटिका की वजह बना : शहर के एक कॉलेज स्टूडेंट को ऑनलाइन स्टडी और मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल के कारण कमर दर्द हुआ। घंटों एक ही जगह बैठकर पढ़ाई करना और एक्सरसाइज न करना उसकी परेशानी का कारण बना। वह पहले से ही मोटापे का शिकार था, जिस वजह से समस्या बढ़ गई। दर्द पैर तक जाने लगा। युवक का बढ़ता स्क्रीन टाइम सायटिका की वजह बना।


