राजस्थान हाईकोर्टट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद सहित अन्य के खिलाफ दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस सुदेश बंसल की अदालत ने याचिकाकर्ता वकील पूरण चंद्र सेन पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता एक वकील भी हैं, और उनसे यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए मनमाने ढंग से कार्य करें। जब भी न्यायालय को यह पता चलता है कि किसी वादी ने गुप्त उद्देश्यों, या फर्जी, तुच्छ और परेशान करने वाली याचिका दायर की है, तो न्यायालय का यह कर्तव्य है कि वह ऐसी याचिका को तत्काल प्रभाव से खारिज करे और वादी पर जुर्माना लगाए, ताकि भविष्य में इस तरह की प्रथाओं पर अंकुश लगाया जा सके। मई 2025 में गोविंदगढ़ थाना, अलवर के वकील पूरणचंद्र सेन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 को भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्षता और अनुच्छेद-15 के विपरीत बताया गया था। याचिका में यह भी कहा गया था कि इस संशोधन के बाद देश में कई साम्प्रदायिक दंगे हुए, इसलिए इनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करके जांच की जानी चाहिए। याचिका में मामला दर्ज करने की थी मांग
दरअसल, याचिकाकर्ता वकील पूरणचंद्र सेन ने याचिका पर बहस करते हुए कहा था कि पीएम नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नागरिकता अधिनियम में संशोधन के जरिए देश की एकता व अखंडता को खतरे में डालने तथा धर्म के आधार पर मुस्लिमों के साथ भेदभाव करने का काम किया है। नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्षता और अनुच्छेद-15 के विपरीत है। इस संशोधन के बाद देश में कई साम्प्रदायिक दंगे हुए। ऐसे में इनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करके जांच की जानी चाहिए। गोविंदगढ़ थाना अलवर ने मामला दर्ज नहीं किया। वहीं मजिस्ट्रेट और रिवीजन कोर्ट ने भी क्षेत्राधिकार से बाहर का मामला बताकर एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया। सीएए संसद ने पास किया
वहीं, केन्द्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आरडी रस्तोगी ने बहस करते हुए कहा कि सीएए संसद ने पास किया है। पीएम नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी संसद का ही हिस्सा हैं। वहीं सीएए की वैधानिकता का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उन्होंने कहा कि निचली अदालतों ने क्षेत्राधिकार से बाहर का मामला होने पर मुकदमा को खारिज किया है, जो बिल्कुल सही हैं। इस तरह की याचिकाएं सिस्टम का दुरुपयोग हैं। उन्होंने कोर्ट से अपील करते हुए कहा कि इस तरह की याचिकाओं को अदालतें पहले भी हैवी कोस्ट लगाते हुए खारिज कर चुकी हैं।


