मोह कषायों को छोड़ने से संयम मिलता है : श्रुत प्रभ महाराज

भास्कर न्यूज|ब्यावर शासन दीपक श्रुत प्रभ महाराज ने समता भवन में प्रवचन के दौरान भजन के माध्यम से कहा कि संसार दुख से झुलस रहा, वैरागी बनूं, वैरागी बनूं-वैरागी बनूं…। हर जीव में दीक्षा लेने की चाहत रहती है, लेकिन उनको पांचों इंद्रियों को सुखों से छुड़ा नहीं सकते, इनके छूटे बिना मोह को छोड़े बिना कषाय छूटेगा नहीं, कषायों को छोड़े बिना वैराग आएगा नहीं। पहले महापुरुषों पर इतना परिसह आते थे, आज उनके सामने कुछ नहीं, आज हमने मोह की दीवारें, इतनी गाढ़ी कर ली जो छूटने का नाम भी नहीं ले रही। दीक्षा लेनी है तो परिसह को भूल जाओ और अपने मन को घर पर छोड़कर चले जाओ। यत्नेश मुनि ने भजन के माध्यम से कहा कि सच्चे वैरागी पाना मुक्ति सुखदायी है, लक्ष्य को पाना ही संयम है। इससे पहले पराग श्रीजी महाराज ने कहा कि आज का प्रसंग दिल में खुशी की लहर पैदा करने वाला है। दीक्षा एक खिलौना नहीं संयम शाश्वत गेम है जिसे खेलना आ जाए वो आत्मा मोक्ष का छक्का लगा देती है। अनीष काठेड़ का कल गुरु की गोदी में सिर होगा और गुरु का हाथ इनके सिर पर होगा। ब्यावर संघ का सौभाग्य है कि डेढ़ साल में पांचवी दीक्षा होने जा रही है। महेश नाहटा ने कहा कि हु. शि. उ. चौ. श्री. ज. ग. नाना राम चमक रहा भानू समाना, जहां होता है सबका बेड़ा पार ऐसा राम गुरु का दरबार, दीक्षा बंधन नही मोक्ष का द्वार है। ब्यावर की नगरी बारह महीने धर्म की गंगा बह रही उसी गंगा में अनीष काठेड़ इस साल में पहली दीक्षा लेने जा रहे हैं। संयम शतम में 108 दीक्षा हो चुकी जिसमें 29 संत व 79 सतियां शामिल है, संघ में कुल 544 संत सतिया राम गुरु की शोभा बढ़ा रहे हैं, आचार्य श्री रामेश ने अब तक 481 दीक्षा दे चुके। महामंत्री धर्मीचंद ओस्तवाल ने कहा कि आज समता भवन का अदभुत नजारा चौदह महीने में चौथा वरघोड़ा समता भवन में आया। मुमुक्षु के मामाजी रिखबचंद सोनी ने कहा कि हमारे परिवार से आचार्य सुदर्शन मुनि सम्मेत चार दीक्षा अब सबसे लाडले अनीष काठेड़ लेने जा रहे हैं। साधुमार्गी की तीनों इकाईयों का कहना है कि क्या लगातार तीन दिन तक हमारी बाराती की तरह सेवा की। इस मौके पर मुमुक्षु अनीष काठेड़ ने कहा कि अहो मुझ भाग्य को पाया, रामशरण को पाया जैन धर्म को पाया बड़ों को प्रणाम छोटों को जय जिनेंद्र, मैंने पहली बार भीलवाड़ा में दर्शन किए, भगवान अपने हाथों से ऐसी कृपा बरसा रहे, उसी दिन मैंने सोच लिया मेरा सिर गुरु की गोदी में हो और उनका हाथ सिर पर हो। अंत में अध्यक्ष गौतम चंद चौधरी ने सभी खमत-खामणा करते हुए कहा कि हमारा सौभाग्य है मुमुक्षु अनीष की दीक्षा होने जा रही है। आप सब का साधुमार्गी जैन संघ की तीनों इकाईयो की ओर से दीक्षार्थी परिवार को कोई तकलीफ हुई तो क्षमा मांगते हैं।

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