यस बैंक को असेसमेंट ईयर 2019-20 के लिए 2,209 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में इस बात की जानकारी दी। यस बैंक का मानना है कि यह डिमांड गलत है। यस बैंक ने कहा है कि उसे असेसमेंट ईयर 2019-20 के लिए इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 144 के तहत 30 सितंबर 2021 को एक आदेश मिला था। इसमें बैंक को पहले दाखिल इनकम टैक्स रिटर्न में क्लेम किए गए रिफंड के अनुरूप रिफंड प्रदान किया गया था। संबंधित असेसमेंट ईयर को अप्रैल 2023 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने री-ओपन किया। डिपार्टमेंट की नेशनल फेसलेस असेसमेंट यूनिट ने 28 मार्च 2025 को री-असेसमेंट ऑर्डर पास किया था। इसमें कोई एडिशनल डिस-अलाउंस/एडिशंस नहीं किए गए हैं। यानी जिन ग्राउंड पर री-असेसमेंट कार्यवाही शुरू की गई थी, उन्हें छोड़ दिया गया है। इस तरह एक्ट के सेक्शन 144 के तहत पास ओरिजिनल असेसमेंट ऑर्डर में जिस कुल इनकम को असेस किया गया, वही री-असेसमेंट ऑर्डर में भी बरकरार रही। नतीजतन बैंक के खिलाफ इनकम टैक्स की कोई मांग नहीं उठाई जानी चाहिए थी। बिना किसी आधार के ये डिमांड की गई है यस बैंक ने आगे कहा, ‘इसके बावजूद, एक्ट के सेक्शन 156 के तहत जारी कंप्यूटेशन शीट और डिमांड नोटिस में ब्याज समेत 2,209.17 करोड़ रुपए की इनकम टैक्स डिमांड की गई है। यह पहली नजर में बिना किसी बेसिस के की गई डिमांड लगती है।’ आदेश का फाइनेंशियल्स पर कोई असर नहीं होगा बैंक का मानना है कि उसके पास इस मामले में अपनी स्थिति को उचित रूप से सर्टिफाई करने के लिए पर्याप्त आधार हैं। यस बैंक लागू कानून के तहत इस री-असेसमेंट ऑर्डर के खिलाफ अपील और कार्यवाही करेगा। बैंक ने यह भी कहा है कि इस आदेश के कारण उसके फाइनेंशियल्स, ऑपरेशंस और अन्य एक्टिविटीज पर कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है। यस बैंक का शेयर एक साल में 31% गिरा यस बैंक का शेयर शुक्रवार को 2.38% की गिरावट के साथ 16.85 रुपए पर बंद हुआ। बैंक का मार्केट कैप 53.20 हजार करोड़ रुपए है। पिछले 6 महीनों में शेयर की कीमत 25% और साल 2025 में अभी तक लगभग 15% नीचे आई है। एक साल में कंपनी का शेयर 31% गिरा है। बैंक में पूरी 100% हिस्सेदारी पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास है।


