छत्तीसगढ़ समेत बिलासपुर जिले में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं उजागर होने के बाद अब शिक्षा साझा मंच ने चरणबद्ध आंदोलन करने की चेतावनी दी है।शिक्षकों का आरोप है कि मनमर्जी तरीके से चहेतों को बचाने का काम किया गया है। इसके विरोध में पहले चरण में 7 जून को राजधानी रायपुर में मंच पोल खोल अभियान चलाएगा। 10 जून को जिला स्तर पर रैली निकाली जाएगी। जिसके बाद 13 जून को संभागीय कार्यालय का घेराव कर युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को निरस्त करने और गड़बड़ी करने वाले दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की जाएगी। जिला प्रशासन ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है और तमाम खामियों को नजरअंदाज करते हुए कलेक्टर ने कहा कि इसके बाद भी गलती हुई तो जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, कांग्रेस ने भी इस प्रक्रिया और विरोध किया है और आंदोलन की बात कही है। चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेगी कांग्रेस वहीं, इसे प्रक्रिया को कांग्रेस ने साजिश करार दिया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि युक्तियुक्तकरण के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। इसके पहले चरण में 9 से 11 जून तक जहां बीईओ कार्यालय का घेराव किया जाएगा। जयसिंह अग्रवाल ने जानकारी दी कि 15 से 21 जून तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव होगा। इसके बाद 25 जून से 15 जुलाई तक छत्तीसगढ़ प्रदेश में जितने भी स्कूल बंद हुए हैं उन सभी स्कूलों के सामने कांग्रेस कमेटी धरना प्रदर्शन करेगी और सरकार के इस निर्णय का विरोध करेगी। 23 शिक्षक संगठनों में नाराजगी शिक्षक साझा मंच के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने कहा कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर 23 शिक्षक संगठनों ने मिलकर मंच बनाया है। जब उन्होंने शिक्षा विभाग के अफसरों से मुलाकात की थी, तब उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि युक्तियुक्तकरण में कहीं गड़बड़ी और त्रुटि होगी, तो दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा किया था। लेकिन, जब युक्तियुक्तकरण हुआ और अतिशेष शिक्षकों की लिस्ट जारी की गई, तब अफसरों ने भारी अनियमितता की। ऐसी गलती केवल एक-दो जगह नहीं। बल्कि, सभी जगहों पर की गई है। यही वजह है कि युक्तियुक्तकरण को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है। कोई नियम न कानून, अफसरों की चली मनमर्जी शिक्षकों ने आरोप लगाया कि युक्तियुक्तकरण न तो सेटअप 2008 के आधार पर किया गया है और न ही शासन के मार्गदर्शी नियमों का पालन किया गया है। अफसरों ने अपनी मनमर्जी से चहेते शिक्षकों को बचाने का काम किया है। स्कूल में दर्ज संख्या के आधार पर शिक्षकों की गणना की जानी चाहिए थी। इसी तरह विषयवार शिक्षकों की सूची बनानी थी। अतिशेष घोषित करने से पहले शिक्षकों की सीनियरिटी और जूनियरिटी को ध्यान में रखना था। लेकिन, किसी भी नियमों का पालन नहीं किया गया है। स्वामी आत्मानंद स्कूलों के शिक्षकों का किया पदस्थापना काउंसलिंग के दौरान शिक्षकों ने कई शिकायतें कीं, लेकिन अधिकारियों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। प्राथमिक शाला मन्ना डोल में दर्ज संख्या कम होने के बाद भी एक शिक्षक का नाम अतिशेष में नहीं जोड़ा गया। स्वामी आत्मानंद स्कूल पचपेड़ी की शिक्षिका जिज्ञासा स्वर्णकार को भी बिना तर्क अतिशेष सूची में लाकर सेलर पोस्टिंग दे दी गई, जबकि फिजिक्स के दो शिक्षक पहले से अन्य स्कूलों में कार्यरत हैं। शासन के निर्देशों को दरकिनार कर स्वामी आत्मानंद स्कूल के शिक्षकों को हटा दिया गया है। सीनियर टीचर को जानबूझकर अतिशेष सूची में डाला शिक्षकों के मुताबिक, युक्तियुक्तकरण में कई वरिष्ठ शिक्षकों को जानबूझकर अतिशेष की सूची में डाला गया है, जबकि जूनियर को बचा लिया गया है। बिल्हा ब्लॉक के प्राथमिक शाला सिरगिट्टी में 113 दर्ज संख्या के बावजूद वहां हाल में ज्वाइन करने वाले शिक्षक को बचा लिया गया और अन्य शिक्षक का तबादला कर दिया गया। प्राथमिक शाला भरारी में वरिष्ठ शिक्षिका लक्ष्मी बृजवासी को अतिशेष में डाल दिया गया, जबकि उनके बाद कार्यभार संभालने वाले शिक्षक चंद्रहास साहू को यथावत रखा गया है। सूची में अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं, ताकि कोर्ट न जा सके शिक्षक रिक्त और अतिशेष शिक्षकों की सूची में अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। इसका स्पष्ट उद्देश्य यह है कि शिक्षक कोर्ट में प्रमाण न दे सकें। जबकि, नियमानुसार इस सूची को सार्वजनिक करना था। शिक्षकों को दावा-आपत्ति के लिए मौका नहीं दिया गया और न ही आवेदन की पावती दी गई। शिकायतों पर भी नहीं हुई कोई सुनवाई अतिशेष की लिस्ट जारी होने के बाद और काउंसिलिंग के दौरान शिक्षकों ने कई शिकायतें कीं। शासन के नियमों का हवाला दिया। साथ ही कई तथ्य और तर्क दिए गए। लेकिन, अधिकारियों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। यहां तक उनकी आपत्ति आवेदन तक को स्वीकार नहीं किया गया। जिसके कारण शिक्षकों में नाराजगी है। एक ही विषय के कई शिक्षक, फिर भी अतिशेष सूची से बाहर महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल में रसायन शास्त्र के तीन, बालक सरकंडा में जीव विज्ञान के तीन और कन्या शाला में फिजिक्स के दो शिक्षक हैं, जबकि नियमानुसार एक स्कूल में इतने शिक्षक नहीं रखे जा सकते। इसके बावजूद इनका युक्तियुक्तकरण नहीं किया गया। छात्रों की संख्या अधिक, फिर भी रिक्त पद नहीं दर्शाए मस्तूरी के प्राथमिक शाला मानिक चौरी में छात्र संख्या 318 है, फिर भी वहां एक भी रिक्त पद नहीं बताया गया है। इसके विपरीत रहटाटोर स्कूल में 171 छात्रों के लिए तीन रिक्त पद दर्शाए गए हैं। इस तरह की विसंगतियां जिले के कई स्कूलों में देखने को मिली हैं। कलेक्टर बोले- गड़बड़ी सामने आने पर होगी कार्रवाई युक्तियुक्तकरण को लेकर लगातार उठ रहे विवादों के बीच कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सफाई देते हुए कहा कि ह शासन की छवि से जुड़ा मामला है। इसलिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता से की गई है। इसके बाद भी अगर किसी स्तर पर चूक या जानबूझकर बदमाशी हुई है तो संबंधितों पर सख्त कार्रवाई होगी। किसी की मनमानी से शासन की इमेज खराब नहीं होने देंगे। कलेक्टर ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों में शिक्षक अधिक और दूरस्थ क्षेत्रों में कम थे, जिससे शिक्षा और परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहे थे। शासन ने समावेशी शिक्षा के लिए युक्तियुक्तकरण का निर्णय लिया। अब ग्रामीण क्षेत्रों में गणित, रसायन और जीवविज्ञान के शिक्षक मिलेंगे और छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित होगा।


