इंदौर हाई कोर्ट ने एक युवती की आत्महत्या के मामले में आजाद नगर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मानते हुए पुलिस कमिश्नर इंदौर को 12 जनवरी को तलब किया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की सिंगल बेंच ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामला आजाद नगर थाना क्षेत्र का है, जहां एक युवती ने अपने प्रेमी विकास के शादी से इनकार करने के बाद आत्महत्या कर ली थी। आरोप है कि पुलिस ने जांच में आरोपी का मोबाइल जब्त नहीं किया और उसके माता-पिता को भी आरोपी नहीं बनाया। आरोपी के कई लड़कियों से संबंध रहे मृतका के माता-पिता के बयान में बताया गया कि उनकी बेटी पिछले दो साल से आरोपी के साथ रिश्ते में थी। जब वे शादी की बात करने आरोपी के घर गए तो उसके माता-पिता ने 50 लाख रुपए की मांग की और यह कहकर शादी से इनकार कर दिया कि उनके बेटे के कई लड़कियों से संबंध हैं। इस घटना से आहत होकर युवती ने यह कदम उठाया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। बाद में आरोपी की ओर से हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई। जमानत सुनवाई के दौरान मृतका के माता-पिता की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव, संतोष यादव और करण बैरागी ने दलील दी कि पुलिस ने आरोपी को बचाने के इरादे से मोबाइल जब्त नहीं किया और इसी कारण उसके माता-पिता को भी आरोपी नहीं बनाया गया। 12 जनवरी को होगी अगली सुनवाई कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए जांच अधिकारी को तलब किया था। जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और बाद में आरोपी और मृतका के बीच हुई चैट के आधार पर आरोपी को 12 जनवरी 2026 तक अंतरिम जमानत दे दी। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख भी 12 जनवरी तय की है और उस दिन पुलिस कमिश्नर इंदौर को खुद उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कोर्ट ने आजाद नगर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मानते हुए कड़ी टिप्पणी की है।


