युवती को जिंदा जलाने वाले पिता-पुत्र को उम्रकैद:खंडवा में पेट्रोल डालकर आग लगाई; छेड़छाड़ की रिपोर्ट का लिया था बदला

खंडवा में छेड़छाड़ की शिकायत करने से नाराज पिता-पुत्र ने पड़ोस में रहने वाली युवती को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। इलाज के दौरान युवती की मौत हो गई। जघन्य और सुनियोजित इस अपराध में न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सजा द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने आरोपी अर्जुन पिता मांगीलाल (22) और उसके पिता मांगीलाल पिता उमराव (48) निवासी ग्राम नाहल्दा को भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103 (1), 61 (2) के तहत दोषी मानते हुए सुनाई हैं। दोनों को आजीवन कारावास व 20-20 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया। शरीर पर पेट्रोल डालकर आग लगाई
अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी हरिप्रसाद बांके ने बताया कि पीड़िता रक्षा ने कुछ दिन पहले गांव के मांगीलाल के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई थी। इसी का बदला लेने के लिए पिता-पुत्र ने हत्या की साजिश रची। 12 अक्टूबर 2024 की सुबह करीब 10 बजे जब रक्षा घर के बाहर बने बाथरूम जा रही थी, तभी आरोपी अर्जुन वहां पहुंचा और कहा तूने मेरे बाप को अंदर कराया है, आज तुझे जान से खत्म कर दूंगा। इसके बाद उसने बोतल से पीड़िता के शरीर पर पेट्रोल डाल दिया और माचिस से आग लगा दी। आग की लपटों में घिरी रक्षा जान बचाने के लिए घर के अंदर भागी। परिजन और रिश्तेदारों ने कंबल डालकर आग बुझाई और उसे जिला अस्पताल खंडवा ले जाया गया, जहां उसने पुलिस को बयान दिए। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृत्युकालीन कथन बना सबसे अहम सबूत
मामले में थाना कोतवाली की सब इंस्पेक्टर अनामिका राजपूत ने अस्पताल पहुंचकर पीड़िता का बयान लिया और देहाती नालसी दर्ज की। न्यायालय ने मृत्युकालीन कथन को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानते हुए आरोपियों की संलिप्तता प्रमाणित मानी। जांच में सामने आया कि आरोपी मांगीलाल ने अपने बेटे अर्जुन को हत्या के लिए उकसाया और दोनों ने आपसी सहमति से पेट्रोल डालकर पीड़िता को जिंदा जलाया। 4 गवाहों के बयान, मजबूत पैरवी
केस की जांच टीआई अशोक सिंह चौहान ने की, वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से एडीपीओ विनोद कुमार पटेल ने प्रभावी पैरवी करते हुए 14 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए। अदालत ने फैसले में स्पष्ट कहा कि यह अपराध न केवल जघन्य है बल्कि समाज में भय और असुरक्षा फैलाने वाला है। ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई इस तरह का अपराध करने का साहस न कर सके।

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