याददाश्त कमजोर होना अब केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। शहर में बड़ी संख्या में युवा यह कहकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं कि उन्हें छोटी-छोटी बातें याद नहीं रहतीं, पढ़ाई या नौकरी में ध्यान नहीं लगता और दिमाग हमेशा भटका हुआ सा महसूस होता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल, मल्टी टास्किंग, नींद की कमी, तनाव और विटामिन बी12 की कमी प्रमुख कारण हैं। आजकल हर जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध है। लोग नंबर, डेट, नोट्स और यहां तक कि रोजमर्रा की चीजें भी फोन में सेव कर लेते हैं। दिमाग को याद रखने का अभ्यास कम मिल रहा है। लगातार रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने से अटेंशन स्पैन घट रहा है। जब किसी चीज पर ध्यान कुछ सेकेंड से ज्यादा टिकता ही नहीं, तो वह जानकारी लॉन्ग टर्म मेमोरी में नहीं जा पाती। पौष्टिक खाना, रोजाना योग, भरपूर नींद लें पहले जहां किसी डॉक्टर के पास महीने में एक-दो युवा ही भूलने की शिकायत लेकर आते थे, वहीं अब यह संख्या 10 से 15 तक पहुंच गई है। कई युवा फोकस न होने, पढ़ाई या काम में मन न लगने और बार-बार बातें भूल जाने की समस्या बता रहे हैं। कोविड के बाद मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। घंटों फोन चलाने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता, जिससे याद रखने की क्षमता प्रभावित हो रही है। आजकल जंक फूड, बाहर का ज्यादा खाना, मिलावटी चीजें और पेट की खराब सेहत के कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। विटामिन बी12 दिमाग और नसों के सही काम करने के लिए बहुत जरूरी होता है। इसकी कमी से थकान, कमजोरी, चक्कर आना, ध्यान की कमी और याददाश्त कमजोर होना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। रोज का खाना संतुलित और पौष्टिक रखें। रोज योग-ध्यान करें और 7-8 घंटे की नींद लें। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाने से याददाश्त बेहतर हो सकती है। पहले 1-2 केस, अब 10-15 युवा फोकस और याददाश्त की समस्या लेकर पहुंच रहे डॉक्टरों के पास डॉ मोनिका, न्यूरोलॉजिस्ट केस 1 : 30 साल का युवक फोकस न होने की शिकायत लेकर पहुंचा: एक 30 साल का प्राइवेट जॉब करने वाला युवक परिवार के साथ क्लीनिक पहुंचा। परिजनों ने बताया कि वह रोजमर्रा के काम भूलने लगा है और ऑफिस में ध्यान नहीं लगा पा रहा। रूटीन जांच में विटामिन बी12 का स्तर 30 से भी कम पाया गया। इंजेक्शन और दवाइयों से उपचार शुरू किया गया। करीब तीन महीने बाद उसकी याददाश्त और काम करने की क्षमता में सुधार देखने को मिला। केस 2 : 36 साल के व्यक्ति में स्कैन में मिला क्लॉट :36 साल के व्यक्ति को धीरे-धीरे भूलने की आदत होने लगी। ब्लड टेस्ट सामान्य थे, लेकिन समस्या बनी रही। स्कैन करवाने पर दिमाग में क्लॉट मिला। सर्जरी कर क्लॉट निकाला गया। डॉक्टरों के अनुसार नियमित शराब सेवन और अनियमित जीवनशैली इसके पीछे कारण रहे। उपचार के बाद सेहत सुधरी। केस 3 : 22 वर्षीय युवती, रातभर मोबाइल और दिनभर थकान : 22 साल युवती पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम भी करती थी। वह देर रात तक सोशल मीडिया और वेब सीरीज में व्यस्त रहती थी। नींद पूरी न होने के कारण सुबह सिर भारी रहता, पढ़ी हुई चीजें याद नहीं रहतीं और बार-बार बात दोहरानी पड़ती। धीरे-धीरे उसमें एंग्जाइटी भी बढ़ने लगी। परिवार को लगा कि शायद वह डिप्रेशन में है। जांच में कोई बड़ी मेडिकल समस्या नहीं मिली, लेकिन नींद की कमी और अत्यधिक स्क्रीन टाइम को मुख्य कारण माना गया। काउंसलिंग, सीमित स्क्रीन टाइम, नियमित नींद व दवाइयों से तीन से चार महीनों में याददाश्त, मानसिक स्थिति में सुधार हुआ।


