भास्कर न्यूज | अंबिकापुर सरगुजा जिले में यह पहला मौका था, जब युवा उत्सव के कार्यक्रम में सुपर-30 के संस्थापक और प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार ने बच्चों की क्लास लगा जीवन में सफल इंसान बनने के चार मंत्र दिए। आनंद ने कहा प्रबल प्रयास, सकारात्मक सोच, अथक परिश्रम और असीम धैर्य आपके पास है, तो दुनिया में कोई ऐसी सफलता नहीं है, जिसे आप पा न सकें। एआई के जमाने में रटंत विद्या का मूल्य शून्य है। कलाकेंद्र मैदान पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान आनंद ने 2000 से अधिक बच्चों से संवाद कर कहा मेहनत का फल हमेशा मिलता है और वह फल मीठा होता है। रोमानिया और जापान का उदाहरण देकर कहा सरगुजा सहित भारत के बच्चों का उत्साह देख विश्व के कई देश उन्हें अपने यहां बुला रहे हैं। यही हमारी काबिलियत है। यह हमारी मिट्टी की पहचान है। कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। अगर आप कोई भी काम करते हैं, उसे ही सबसे बेहतर कीजिए, यही मेरा मूल मंत्र है। यह मंत्र मेरे पिता जो डाकिया थे, उन्होंने दिया है। अंत में कहा हर चीज का हाऊ और व्हाय जानने की कोशिश करेंगे, तो नई चीजें सामने आएंगी। यहीं दो चीजें आपको दूसरे से बेहतर बनाएंगी। आनंद ने कहा कि आज का जमाना इंटरनेट का है। अगर आप किसी लक्ष्य को दिल से चाह लें, तो आपकी हर समस्या का समाधान आपकी जेब में पड़े मोबाइल में है। बस लक्ष्य पाने की चाह होनी चाहिए। सक्सेस के लिए जरुरी होता है कि सक्सेस को एक लक्ष्य की तरह लेकर जीवन में जिएं। तभी लक्ष्य आसानी से मिल पाएगा। उन्होंने छात्रों को पीपीटी से कार्टून दिखाएं और समझाया कि कम संसाधन में भी कैसे बेहतर कर सकते हैं। संसाधनों का भाव हमारे मनोबल को मजबूत करता है। बस ढृंढनिश्चय करना पड़ेगा। युवाओं से मुखातिब कुमार ने कहा कि पढ़-लिख लेंगे, तो कहीं नौकरी लग जाएगी। पढ़ाई करने वालों के मन में यह सोच नहीं होनी चाहिए। यह सोच इंसान को पंगु बनाती है। उन्होंने सभी छात्रों से सुपर-30 फिल्म के बारे में भी पूछा और फिल्म देखने की बात कही। कहा कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए मत देखिए, फिल्म में पात्रों के संघर्ष को देखिए। उन्होंने फिल्म के पात्र और उनकी मेहनत के बाद जीवन में आए बदलाव को पीपीटी के जरिए दिखाया कि कैसे दो जून की रोटी के लिए मोहताज लड़का पढ़ाई की बदौलत अमेरिका की सबसे बड़ी कंपनी में काम कर रहा है। आनंद ने शिक्षकों की भी क्लास लगाई। शिक्षकों को छात्रों में नई सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करने उपाय भी बताए। कहा कि शिक्षक खुद भी किसी विषय को जितनी गहराई से सोचेंगे, उतनी ही नई चीजें निकलकर सामने आएंगी। उन्होंने सुपर-30 की स्थापना के लिए किए संघर्ष, कोचिंग बंद करने चली गोली, चाकू और बम से हुए हमले का भी जिक्र किया। आनंद ने बताया कि अब यू-ट्यूब पर सभी बच्चों के लिए क्लास फ्री की तैयारी है। इससे पूरे भारत के बच्चे, जिनके पास संसाधनों का अभाव है, वें मेहनत कर आगे बढ़ेंगे। अध्ययन, कैरियर और मार्गदर्शन के लिए राज्य युवा आयोग और जिला प्रशासन की तरफ से युवा उड़ान कार्यक्रम कराया गया। इसमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्रों के साथ शिक्षक भी पहुंचे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक प्रबोध मिंज, महापौर मंजूषा भगत, निरुपा सिंह, कलेक्टर अजीत वसंत और प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में लेखक नीलोत्पल मृणाल ने भी खूब रंग जमाया। उन्होंने बच्चों को भारत की तकदीर बताया और सरगुजा हवे…छत्तीसगढ़ के मुरेठा गीत सुनाकर जमकर तालियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि पापड़ जब तक आग में नहीं भूनता है, तब तक उसका स्वाद नहीं आता है। छात्र अपनी मेहनत से नहीं भूनेगा, तो सफलता मिलने से रही। सफलता चाहिए, तो तपना पड़ेगा ही। ग्रामीण परिवेश के छात्रों से कहा कि आज उनका सबसे बड़ा डर उनका बैकग्राउंड है, लेकिन बच्चे अपने बैकग्राउंड, माटी, परिवार और परिवेश पर गर्व करें, तभी वें देश के हो पाएंगे। गणितज्ञ आनंद ने कहा- आज एआई के दौर में रटंत विद्या का मूल्य शून्य सफलता चाहिए तो तपना तो पड़ेगा ही: लेखक मृणाल छात्रों में नई सोच विकसित करने शिक्षकों को जिम्मा


