युवा दिवस पर प्रदेश के युवाओं के लिए बड़ा फैसला:हर कॉलेज छात्र का हेल्थ रिकॉर्ड रखेगी मप्र सरकार

स्वामी विवेकानंद जयंती (युवा दिवस) पर मप्र सरकार ने प्रदेश के युवाओं के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब कॉलेज में एडमिशन लेते ही हर युवा का हेल्थ रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके जरिए शिक्षा के साथ युवाओं की फिजिकल, मेंटल और इमोशनल हेल्थ को बेहतर बनाया जाएगा। इसके लिए रवींद्र भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को ‘युवा शक्ति मिशन’ लॉन्च किया। मिशन के अंतर्गत ‘उमंग शिक्षा हेल्थ एंड वेलनेस’ कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके तहत मप्र के सभी यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में हर युवा विद्यार्थी का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। सभी का आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा आईडी) बनाया जाएगा। इस कार्यक्रम को उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग मिलकर संचालित करेंगे।
युवाओं के लिए टेली मानस (14416) सेवाएं उपलब्ध कराई गई है। साथ ही, उमंग हेल्पलाइन नंबर 14425 भी जारी किया गया है। इस पर युवा स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ले सकेंगे। युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव और उससे मुक्ति के उपायों की जानकारी देने के लिए ‘जस्ट आस्क’ चैटबोट भी शुरू किया गया है।
प्रदेश के कॉलेजों में 13 लाख से ज्यादा छात्र
2028 तक… प्रदेश के 70 फीसदी युवाओं को रोजगार युवा पोर्टल भी लॉन्च। इस पर सरकार के सभी विभागों की योजनाओं की जानकारी मिलेगी।
युवा शक्ति मिशन… संवाद से लेकर स्वावलंबी तक
.. और इधर, सीएम के भाषण पर कांग्रेस ने कसा तंज
सीएम ने अपने संबोधन में क्रांतिकारी मदनलाल ढींगरा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जलियावाला बाग नरसंहार के दोषी जनरल डायर को इंग्लैंड में गोली मारकर हिसाब चुकता किया था। इस पर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा कि डायर की हत्या ऊधम सिंह ने की थी, मदनलाल ढींगरा ने नहीं। शायद आपके भाषण लिखने वालों को इतिहास का ज्ञान नहीं। इससे युवाओं में गलत संदेश जाएगा।
सीएस बोले- विवेकानंद को न पढ़ता तो शायद आज मैं वह नहीं होता, जो हूं
कार्यक्रम में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा- एक समय ऐसा था जब मुझे जिंदगी से विरक्ति महसूस होने लगी थी। मेरे पास पैसों की कोई कमी नहीं थी, लेकिन जीवन में कोई चुनौती भी नहीं थी। फिर मैंने स्वामी विवेकानंद और भागवत गीता को पढ़ा। जैन धर्म के कर्म सिद्धांतों का अध्ययन किया। इसके बाद मैंने सिविल सर्विसेज में जाने का निर्णय लिया। यदि तब मैंने विवेकानंद को न पढ़ा होता, तो शायद आज मैं वह नहीं होता, जो हूं।

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