यूक्रेन के पास अमेरिकी हथियार खरीदने के पैसे नहीं:₹6,840 करोड़ कम पड़े; जेलेंस्की आज अमेरिका को नया शांति प्लान पेश करेंगे

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार को कहा कि इस साल अमेरिकी हथियार खरीदने के लिए करीब 6,800 करोड़ रुपए कम पड़ रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि यह फंडिंग यूरोपीय देशों से आनी थी, लेकिन समय पर पैसे नहीं मिल सके। जिससे हथियारों की आपूर्ति में देरी हो सकती है। जेलेंस्की ने यह बात लंदन में फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के नेताओं के साथ बैठक के बाद कही। उन्होंने कहा कि NATO की PURL (Presidential Ukraine Relief Loan) पहल के तहत हथियार खरीद जारी रखने के लिए अतिरिक्त फंडिंग की जरूरत है, लेकिन अमेरिका ने भी मदद देना कम कर दिया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी हथियार खरीदने के लिए यूक्रेन को लगभग 15 अरब डॉलर (लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपए) की जरूरत है। वहीं, जेलेंसेकी आज अमेरिका को एक संशोधित शांति प्लान सौंपेंगे। यह प्लान ट्रम्प के 28 पाइंट प्लान को घटाकर 20 प्वाइंट में बदली गई है। जर्मन चांसलर बोले- अमेरिका के रुख पर शक ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बैठक की मेजबानी करते हुए साफ कहा कि शांति प्रक्रिया में यूक्रेन को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय फैसले खुद लेने का पूरा अधिकार है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने दावा किया कि यूरोपीय देशों के लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूस की अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ना शुरू हो गया है। वहीं, जर्मन चांसलर मर्ज ने अमेरिका के रुख पर शक जताते हुए कहा कि कुछ पहलुओं पर यूरोपीय देशों में गंभीर चर्चा जरूरी है, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया। यूक्रेन को हथियार खरीद के लिए फंडिंग मिलती यूक्रेन आवश्यकता सूची (Prioritized Ukraine Requirements List – PURL) यूक्रेन की जंग में सैन्य मदद के लिए बनाया गया था। यह NATO की पहल है, जो यूक्रेन को लोन के रूप में फंडिंग देती है। यह रिलीफ लोन है, यानी आपदा राहत के लिए उधार। इसकी शुरुआत जुलाई 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और NATO महासचिव मार्क रुट्टे के बीच व्हाइट हाउस में हुई बैठक में हुई थी। इस बार यूरोपीय देशों से जो फंडिंग नहीं मिली, वह किन-किन देशों से आनी थी और क्यों अटकी इसके बारे में जेलेंस्की ने ज्यादा जानकारी नहीं दी। PURL कैसे काम करती है? NATO सदस्य देश (जैसे जर्मनी, कनाडा) यूक्रेन को कम ब्याज पर पैसा उधार देते हैं, जिसका इस्तेमाल हथियार खरीदने या रक्षा में होता है। यूक्रेन को बाद में इसे चुकाना होगा। यह यूक्रेन को बिना अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर हुए तुरंत हथियार उपलब्ध कराने का तरीका है। इस कार्यक्रम के तहत, यूरोपीय NATO सदस्य देश पैसे जुटाते है, जो अमेरिकी स्टॉक से हथियार खरीदने के लिए इस्तेमाल होता है। NATO इसकी देखरेख करता है, ताकि यू्क्रेन अपनी जरूरतों के हिसाब से हथियारों की लिस्ट बना सके। इनमें खासकर वे हथियार शामिल होते हैं जो यूरोप में कम बनते हैं। इनमें पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, HIMARS मिसाइलें, गोला-बारूद और दूसरे महत्वपूर्ण हथियार शामिल हैं। हर पैकेज की कीमत लगभग 500 मिलियन डॉलर होती है। अमेरिका भी NATO का सदस्य अमेरिका खुद NATO का सदस्य है। नाटो एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन है। 2025 तक नाटो के 32 सदस्य देश हैं। इसका मकसद सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाहरी हमलों से उनकी रक्षा करना है। अमेरिका NATO खर्च में 66% हिस्सा देता है। यूक्रेन जंग रोकने ट्रम्प का 28 पॉइंट प्लान अमेरिका ने 21 नवंबर को 28 प्वाइंट का पहला शांति प्लान पेश किया था। प्लान के मुताबिक यूक्रेन को अपना लगभग 20% हिस्सा रूस को देना होगा। इसमें पूर्वी यूक्रेन का डोनबास का इलाका शामिल है। यूक्रेन मात्र 6 लाख जवानों वाली सेना ही रख सकेगा। नाटो में यूक्रेन की एंट्री नहीं होगी। नाटो सेनाएं यूक्रेन में नहीं रहेंगी। प्लान में कहा गया है कि रूस द्वारा शांति प्रस्तावों को मानने पर उस पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटा दिया जाएगा। साथ ही यूरोप में जब्त की गई लगभग 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति भी डीफ्रीज होगी। ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज ने शुक्रवार को कहा कि उनका देश यूक्रेन के साथ हैं। यूरोप बोला- अमेरिका का शांति प्लान रूस के लिए फायदेमंद अमेरिका के शांति प्लान में यूक्रेनी सुरक्षा गारंटियों का जिक्र है, लेकिन साथ ही यूक्रेन से जमीन छोड़ने, सेना की संख्या कम करने और नाटो को यूक्रेन में सैनिक भेजने से रोकने की भी मांग की गई है। यूरोप ने इसे रूस के लिए फायदेमंद बताते हुए खारिज कर दिया और 23 नवंबर को जेनेवा में अपना 19 प्वाइंट काउंटर-प्लान बनाया। यह योजना अब 20 सूत्री हो गई है। ट्रम्प ने इसपर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि जेलेंस्की ने अभी तक अमेरिका के प्लान को पूरी तरह नहीं पढ़ा है। ट्रम्प ने कहा – “रूस तो मान रहा है, लेकिन जेलेंस्की नहीं।” इसके बाद ट्रम्प ने 7 दिसंबर को कहा कि “जेलेंस्की के लोग तो प्लान को पसंद कर रहे हैं, रूस भी मान रहा है, लेकिन जेलेंस्की तैयार नहीं लग रहे। मैक्रों बोले थे- अमेरिका यूक्रेन को मजबूर कर सकता है फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका, यूक्रेन को धोखा दे सकता है। जर्मन अखबार डेर श्पीगल के मुताबिक 1 दिसंबर को यूरोपीय नेताओं की एक सीक्रेट वीडियो कॉल लीक हो गई थी। इसमें जर्मनी के चांसलर फेडरिक मर्त्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब, नाटो के महासचिव मार्क रूटे, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की शामिल थे। इस दौरान मैक्रों ने शक जताया था कि अमेरिका बिना मजबूत सुरक्षा गारंटी दिए यूक्रेन को क्षेत्र छोड़ने के लिए मजबूर कर सकता है। इस कॉल की रिकॉर्डिंग अखबार के पास पहुंची थी। ​​​​​​2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग रूस-यूक्रेन जंग फरवरी, 2022 में शुरू हुआ था। दोनों देशों के बीच जंग की बड़ी वजह रूस का यूक्रेनी जमीन पर कब्जा है। रूस ने यूक्रेन के लगभग 20% क्षेत्र पर कब्जा कर रखा है। युद्ध के कारण हजारों नागरिक और सैनिक मारे गए हैं और लाखों यूक्रेनियन विस्थापित हुए हैं। जून 2023 तक, करीब 80 लाख यूक्रेनी लोग देश छोड़कर भाग चुके हैं। ट्रम्प ने युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के साथ बैठक की थी। हाल ही में, उन्होंने पुतिन के साथ अलास्का में बैठक की, जो 80 वर्षों में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी।

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