यूजीसी के नए कानून पर विप्र फाउंडेशन का विरोध-प्रदर्शन:उदयपुर में पीएम मोदी के नाम पर हुआ हंगामा, अपनों में ही उलझे कार्यकर्ता

उदयपुर में भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर विप्र समाज और स्वर्ण संगठनों में रोष देखने को मिल रहा है। विप्र फाउंडेशन के बैनर तले समाज के लोगों ने जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर इस कानून को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की। वही इस दौरान संगठन के कार्यकर्ता ही आपस में भिड़ गए। विवाद की शुरुआत जनता सेना से जुड़े पंकज सुखवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करने से हुई। इस वहां मौजूद भाजपा नेता अर्चना शर्मा ने इन नारों पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे गरिमा के विरुद्ध बताया। अन्य पदाधिकारियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करवाया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह नया कानून संविधान के मूल ढांचे और समानता के अधिकार पर प्रहार है। विप्र फाउंडेशन और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14, 15 और 21 प्रत्येक नागरिक को समानता और सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन यूजीसी द्वारा लाया गया नया कानून इन प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। संगठनों का आरोप है कि इस बदलाव के जरिए सामान्य वर्ग के अधिकारों और उनके संवैधानिक संरक्षण को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे समाज के एक बड़े वर्ग में असुरक्षा और असंतोष का भाव है। प्रदर्शन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल, राकेश जोशी, मगन जोशी, केशव व्यास और सुरेश शर्मा सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई जब संगठन के कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए। विवाद की शुरुआत तब हुई जब जनता सेना के नेता पंकज सुखवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। वहां मौजूद भाजपा नेता अर्चना शर्मा ने इन नारों पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे गरिमा के विरुद्ध बताया। अर्चना शर्मा का कहना था कि विरोध नीतिगत मुद्दों और नियमों पर होना चाहिए, न कि देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी पर। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच माहौल गरमा गया और तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते विप्र सैनिक दो धड़ों में बंटे नजर आए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। विवाद को बढ़ता देख वहां मौजूद वरिष्ठ पदाधिकारियों और समाज के अन्य प्रबुद्ध जनों ने हस्तक्षेप किया। काफी देर तक चली समझाइश और बीच-बचाव के बाद दोनों पक्षों को शांत किया गया, जिसके बाद मामला ठंडा पड़ा और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया पूरी हुई।

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