यूजीसी नियमों के समर्थन में रैली निकालकर कलेक्टोरेट का घेराव

भास्कर न्यूज| महासमुंद विश्वविद्यालयों में व्याप्त जातिगत भेदभाव को समाप्त करने और आरक्षित वर्ग के रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर बुधवार को छत्तीसगढ़िया सर्व समाज (एससी-एसटी-ओबीसी) महासंघ ने जिला मुख्यालय में रैली निकाल प्रदर्शन किया। बीटीआई रोड स्थित साहू भवन से निकली हुंकार रैली में करीब 150 से अधिक पदाधिकारी और सदस्य शामिल हुए, जिन्होंने नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी कानून लागू करो, ”रिक्त पदों पर भर्ती करो” और ”शिक्षा के मंदिर में जातिगत भेदभाव बंद करो” जैसे नारों के साथ माहौल गर्मा दिया। कलेक्ट्रेट पहुंचकर महासंघ ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर हल्ला बोला। छत्तीसगढ़िया सर्व समाज के जिला अध्यक्ष बसंत सिन्हा ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 (क) की मूल भावना के अनुरूप यूजीसी द्वारा अधिसूचित नए नियम उच्च शिक्षा को अधिक समावेशी और पारदर्शी बनाएंगे। महासंघ के अनुसार, ये नियम वंचित वर्गों के विद्यार्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करेंगे और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक होंगे। चौंकाने वाले आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि आजादी के 78 वर्षों बाद भी उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव की घटनाएं कम नहीं हुई हैं। उन्होंने बताया कि यूजीसी संसदीय समिति और सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118% की भारी वृद्धि हुई है। महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इन तथ्यों को मजबूती से रखा जाए, ताकि नए नियमों पर लगी रोक हट सके। इस दौरान छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे, जिन्होंने अपनी मांगों को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई। एनएफएस बताकर बाहर करने का लगाया आरोप महासंघ ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एससी के 64%, एसटी के 83% और ओबीसी के 80% पद रिक्त पड़े हैं। इसके विपरीत, सामान्य वर्ग के 80% पद भरे हुए हैं। योग्य अभ्यर्थियों को नॉट फाउंड सूटेबल (एनएफएस) बताकर बाहर कर दिया जाता है। महासंघ ने केंद्र सरकार के सामने रखी यह प्रमुख मांगें विश्वविद्यालयों में एससी-एसटी-ओबीसी वर्ग के सभी रिक्त पदों को नियमों में शिथिलता प्रदान कर तत्काल भरे जाने और जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी के नए समता विनियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग महासंघ ने की है। उच्च शिक्षा संस्थानों में सभी वर्गों की समान भागीदारी सुनिश्चित की मांग भी रखी गई है।

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