अगर आप यूडी टैक्स प्रापर्टी के दायरे में हैं और आप समय पर टैक्स नहीं भर रहे तो सावधान हो जाएं। सरकार आपसे अब ये टैक्स वसूलकर ही रहेगी। जल्दी ही आपके बिजली बिल में यूडी टैक्स जुड़कर आएगा। इसके बाद टैक्स के कारण आपने बिजली का बिल जमा नहीं किया तो आपके घर की बत्ती भी गुल हो सकती है। पूरे प्रदेश में ढाई हजार करोड़ के आसपास बकाया यूडी टैक्स को वसूलने के लिए सरकार ने ये घेराबंदी की है। अकेले बीकानेर नगर निगम का करीब 140 करोड़ यूडी टैक्स बकाया है। हर साल औसतन 10 करोड़ टैक्स बनता है। वो भी 2005 के सर्वे के अनुसार। अगर नए सिरे से सर्वे हो तो ये टैक्स हर साल का 40 करोड़ के आसपास जाएगा। 10 करोड़ की जगह हर साल जमा एक से तीन करोड़ ही होता है। हर साल दो तिहाई बिल वसूल नहीं पाते और फिर उस पर ब्याज लगाया जाता है। ऐसे करके बकाया 140 करोड़ तक पहुंच गए। ये वो राशि है जो अगर निगम को मिल जाए तो शहर की सड़कों का कायाकल्प हो जाए। शहर का पूरा ड्रेनेज सिस्टम ही निगम तैयार कर सकता है। तमाम हथकंडे अपनाने के बाद भी जब टैक्स की वसूली नहीं हो पाई तो सरकार अब टैक्स धारकों की ऐसी घेराबंदी करने की तैयारी में है कि टैक्स के दायरे में आए सभी लोगों को टैक्स भरना ही होगा। अगर नहीं भरा तो वहां की बिजली कट जाएगी। हालांकि अभी ये प्रस्ताव पाइप लाइन में हैं लेकिन सरकार और यूडीएच विभाग इसको लेकर गंभीर है और इसकी कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश 252 निकायों से बकाये यूडी टैक्स, दायरे में आने वालों की संख्या समेत तमाम डिटेल मांगी गई है। बिजली विभाग से भी चर्चा शुरू हो गई है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि केन्द्र सरकार ने पिछले साल की तुलना में 18 प्रतिशत ज्यादा टैक्स ना वसूलने वाले निकायों के तमाम अनुदान रोकने की चेतावनी दी थी। वो तमाम सवाल जो आपके दिमाग में उठ रहे और उनके जवाब Q| जिनके मकान हैं क्या उन पर भी टैक्स आएगा? A| यूडी टैक्स 300 वर्ग गज से अधिक क्षेत्रफल के आवासीय घरों और जहां कॉमर्शियल गतिविधियां चल रहीं वहां लगता है। Q| तो मेरे बिजली के बिल पर कोई असर होगा? A| सभी घरेलू बिलों पर असर नहीं होगा। बड़े आवासों में भी बिल उनका ज्यादा आएगा जिन्होंने यूडी टैक्स जमा नहीं किया। Q| मैं यूडी टैक्स के दायरे में हूं। मेरा टैक्स 50 लाख बाकी है तो क्या एक ही बिल में ये पैसा वसूला जाएगा? A| नहीं, पर पूरा टैक्स आपके 12 बिलों में जरूर एडजस्ट होगा। इसलिए बेहतर है कि आप समय से पहले ही जमा कर दो। Q| बिजली के बिल में टैक्स जुड़कर आया और मैने बिल ही जमा नहीं किया तो क्या होगा? A| तो आपको एक-दो महीने की मोहलत तो मिल सकती है मगर बाद में आपका कनेक्शन कट जाएगा। बिना बिजली ना तो संस्थान चलेगा करेगा ना घर। Q| अभी तो 2005 के सर्वे के दायरे वाले सेंटर टैक्स के दायरे में हैं। मैने उसके बाद सेंटर खोला तो क्या मेरा भी बिल आएगा? A| निगम जब बिजली से टैक्स वसूलेगा तो पहले सर्वे भी कराएगा। अगर सर्वे नहीं कराया और आप अभी टैक्स के दायरे में नहीं आए तो बिल नहीं आएगा। पर आपने अगर लोन लेकर कामर्शियल सेंटर खोला तो आप खुद ब खुद ही उसके दायरे में आ चुके हेांगे। Q| मेरा टैक्स बिजली विभाग के पास जाएगा तो निगम को क्या फायदा होगा ? A| सरकार यूडी टैक्स का पैसा बिजली विभाग से लेकर यूडीएच को देगी। वो फिर संबंधित निकाय को भेजेगी। बिल से सिर्फ टैक्स वसूलने का रास्ता है। सर्वे फिर भी करना होगा निगम ने 2005 में यूडी टैक्स का सर्वे किया था तब सिर्फ 10 हजार प्रापर्टी टैक्स के दायरे में थी। धीरे-धीरे कुछ और बढ़ी और अब 13 हजार से ऊपर प्रापर्टी पहुंच गई। मगर 20 साल से सर्वे ना होने के कारण हजारों प्रापर्टी ऐसी जो टैक्स के दायरे में नहीं आई। उसके लिए निगम को नए सिरे से सर्वे कराना होगा। एक अनुमान के मुताबिक इस वक्त शहर में 40 हजार से ज्यादा प्रॉपर्टी यूडी टैक्स के दायरे में होंगी जिनसे हर साल करीब 40 करोड़ रुपए का टैक्स आ सकता है। लोग ऐसे देंगे नहीं, सरकार मजबूती से वसूले, इस पैसे से विकास करे सरकारें कमजोर होती हैं। उनको टैक्स से ज्यादा वोटों का ध्यान रखना पड़ता है। वरना इस रास्ते से कोई बेहतर विकल्प नहीं है। सरकार को सिर्फ एक आदेश जारी कर तमाम डाटा बिजली विभाग को देना है। पर हां, इतना ध्यान जरूर रखें कि एक मुश्त ना वसूलें। कुछ लोगों की स्थिति ठीक नहीं होती और कुछ लोग जानबूझकर नहीं देते। वे निकायों के नोटिस को सीरियस ही नहीं लेते। वैसे तो अभी भी सीज और कुर्की का प्रोविजन होता है पर राजनीतिक दखल इतना कि एक सीज की 50 सिफारिशें आती हैं। इसलिए बिजली बिल से टैक्स अगर किस्तों में वसूला जाए तो सबसे अच्छा। पर जमा होने वाली राशि को जनहित के काम में ही लगाएं। जिस निकाय का जितना पैसा आया उसे उसी निकाय को वापस इस शर्त पर करें इसका उपयोग जनहित में हो।


