ये जांच जरूरी जो फिलहाल सिर्फ निजी लैब में हो रहे

भास्कर न्यूज | जशपुरनगर बीते साल नवंबर माह में जशपुर जिला अस्पताल में हमर लैब की स्थापना हुई थी। इस लैब में कुल 105 तरह के जांच की व्यवस्था की गई है। पर वर्तमान में सिर्फ 56 तरह की जांच यहां हो रही है। बताया जाता है कि जांच के लिए लैब में पहुंची मशीनों में से अधिकांश मशीनें बंद पड़ी हैं। इसके साथ ही जांच के लिए जरूरी कैमिकल भी नहीं भेजी जा रही है। ऐसी स्थिति में मरीजों को जरूरी जांच के लिए निजी लैब के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बताया जाता है कि हमर लैब योजना के तहत सामान की सप्लाई करने वाला कारोबारी कथित तौर पर 400 करोड़ के घोटाले के आरोप में जेल में बंद है। उसके द्वारा सप्लाई की गई मशीनों में पासवर्ड लॉक लगा हुआ है। इन मशीनों को चालू करने के लिए उसी कारोबारी के कर्मचारी पहुंचने वाले थे। इससे पहले ही घोटाले के आरोप में कारोबारी गिरफ्तार कर लिया गया। अब ना तो उस कारोबारी द्वारा लॉक का पासवर्ड बताया जा रहा है और ना ही उसके कोई कर्मचारी जशपुर पहुंचकर मशीनों को चालू करा रहे हैं। इधर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन द्वारा कैमिकल की सप्लाई के लिए जिस कंपनी को वर्क आर्डर दिया गया है, उसके द्वारा कैमिकल की सप्लाई नहीं की जा रही है। {शुगर की जांच के लिए एचबीए 1 सी– एचबीए1सी परीक्षण, जिसे ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन परीक्षण के रूप में भी जाना जाता है, एक रक्त परीक्षण है जो पिछले 2-3 महीनों में आपके औसत रक्त शर्करा के स्तर को मापता है। {सोडियम पोटेशियम {थायराइड प्रोफाइल {लिपिड प्रोफाइल {हिमेटोग्राम {आरएफटी– आरएफटी का मतलब रीनल फंक्शन टेस्ट है। इसे किडनी फंक्शन टेस्ट भी कहा जाता है। यह एक तरह का ब्लड टेस्ट है जो किडनी के काम करने की क्षमता को मापता है। आरएफटी परीक्षणों की एक श्रृंखला है जो गुर्दे के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए की जाती है। {सीआरपी– सीआरपी टेस्ट एक रक्त परीक्षण है जो शरीर में सी-रिएक्टिव प्रोटीन के स्तर को मापता है। यह प्रोटीन लीवर द्वारा बनाया जाता है और शरीर में सूजन होने पर इसका स्तर बढ़ जाता है। {ईएसआर– ईएसआर टेस्ट, जिसे एरिथ्रोसाइट सेडिमेंटेशन रेट भी कहा जाता है, एक रक्त परीक्षण है जो शरीर में सूजन का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह परीक्षण लाल रक्त कोशिकाओं के एक टेस्ट ट्यूब में कितनी तेजी से नीचे बैठने की दर को मापता है। केमिकल मंगाने के लिए अलग से टेंडर निकाल रहे ^कैमिकल मंगाने के लिए अलग से टेंडर किया जा रहा है। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और मांग पत्र भरकर जरूरी कैमिकल मंगा लिए जाएंगे। इसके बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी। अभी भर्ती मरीजों की जांच निजी लैब से ही अस्पताल प्रबंधन द्वारा कराया जा रहा है। जिसके बिल का भुगतान भी जल्द कर दिया जाएगा। डॉ विपिन इंदवार, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल। सिर्फ भर्ती मरीजों का टेस्ट करा रहा अस्पताल प्रबंधन अस्पताल में जो मरीज भर्ती हैं, उनके लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा निजी लैब से मुफ्त में जांच की सुविधा मुहैया कराई गई है। बताया जाता है कि अबतक भर्ती मरीजों की जांच का बिल करीब डेढ़ लाख रुपए हुआ है। यह राशि अस्पताल प्रबंधन द्वारा निजी लैब को भुगतान नहीं किया गया है। जिससे भर्ती मरीजों की मुफ्त जांच भी आने वाले दिनों में प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है।

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