लुधियाना में एक डॉल आजकल लोगों की ज़िंदगी बदल रही है, वो भी उलटी दिशा में। नाम है लाबुबू डॉल। पहले सिर्फ खिलौना समझी जाने वाली यह डॉल अब शो-ऑफ का सिंबल बन गई है। सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी रील्स और ट्रेंडिंग पोस्ट ने इसे ग्लैमर का हिस्सा बना दिया है। लेकिन यह ट्रेंड अब मानसिक दबाव की वजह बन रहा है। महिलाएं इसे किट्टी पार्टियों में घुमाकर स्टेटस दिखा रही हैं। बच्चे इसे न मिलने पर पेरेंट्स से नाराज हो रहे हैं। कई मामलों में यह लत बन चुकी है। शहर के काउंसलिंग क्लिनिक अब ऐसे मामलों से भरने लगे हैं। फोमो यानी ‘कुछ छूट न जाए’ का डर, पियर प्रेशर और सोशल मीडिया का दिखावा- ये सब मिलकर लोगों को खर्च, गुस्सा और तनाव की ओर ले जा रहे हैं। ये सिर्फ एक डॉल नहीं रही- यह एक नया मेंटल ट्रिगर बन गई है। जो लोग अकेलेपन या तनाव में होते हैं, वे ऐसे ट्रेंड्स के शिकार जल्दी होते हैं। लाबुबू डॉल इसका ताजा उदाहरण है। बच्चे दोस्तों से पीछे न छूटें, महिलाएं सोशल मीडिया में बनी रहें – यही मानसिक दबाव इन्हें घेर रहा है। इसका इलाज सख्ती नहीं, समझदारी है। बच्चों की हर मांग न मानें। महिलाओं को खुद समझना होगा कि दिखावा कभी स्थायी नहीं होता। परिवार में संवाद बढ़ाएं। डिजिटल नहीं, रियल दुनिया में जीना सिखाएं। जितनी दूरी इस ट्रेंड से रखेंगे, उतनी शांति ज़िंदगी में रहेगी। 1. किट्टी पार्टी में छाने की चाह, डॉल पर उड़ाई सेविंग: लुधियाना की एक 30 वर्षीय गृहिणी को लाबुबू डॉल कलेक्ट करने का शौक ऐसा चढ़ा कि उन्होंने इसे जुनून बना लिया। शुरुआत एक प्यारी-सी डॉल से हुई, लेकिन जल्दी ही उन्हें हर नया वेरिएंट चाहिए था। उनके फ्रेंड सर्कल में यह डॉल ट्रेंड बन चुकी थी, और किट्टी पार्टियों में हर बार नई डॉल लेकर जाना एक तरह का स्टेटस बन गया था। पति की सलाह, समझाइश सब बेकार साबित हुई। अब तक वे लगभग 15 लाख रुपए सिर्फ डॉल्स पर खर्च कर चुकी हैं। काउंसलिंग क्लिनिक पहुंचने पर पता चला कि वे (फियर ऑफ मिसिंग आउट), दिखावे की मानसिकता और सोशल मीडिया इंफ्लुएंस के चक्रव्यूह में फंस चुकी हैं। 2. 13 साल की बच्ची डॉल के लिए पेरेंट्स से भिड़ी: एक 13 वर्षीय बच्ची लाबुबू डॉल को लेकर इतनी ज़िद्दी हो गई कि जब माता-पिता ने इसे खरीदने से इनकार किया, तो वह घर में सब पर चिल्लाने लगी। बच्ची का कहना था, ‘मेरी फ्रेंड्स के पास है, मेरे पास क्यों नहीं?’ वह किसी की बात नहीं मानती थी, हर बात पर गुस्सा और चिढ़चिढ़ापन दिखाने लगी। माता-पिता जब काउंसलिंग के लिए पहुंचे, तो सामने आया कि बच्ची पर पियर प्रेशर इतना हावी था कि वह खुद को कमतर महसूस करने लगी थी। 3. डॉल को लेकर दंपती में आई दरार: एक युवा दंपती के बीच लाबुबू डॉल ऐसा मुद्दा बन गई, जिसने उनके रिश्ते को ही हिला दिया। प|ी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थीं। उनके फ्रेंड सर्कल में लाबुबू डॉल एक फैशन स्टेटमेंट बन चुकी थी। वहीं पति इसके खर्च और सोशल अफवाहों से परेशान थे। उन्होंने प|ी का ऑनलाइन शॉपिंग एक्सेस तक सीमित कर दिया, ताकि डॉल न मंगवाई जा सके। इस बात पर दोनों के बीच बहस बढ़ती चली गई। साइकोलॉजिकल जाल है फिजूल खर्च इतना कि घर में कलेश रहने लगा है- बच्चे बदतमीजी पर उतर आए हैं भास्कर एक्सपर्ट डॉ. राघव अरोड़ा, मनोचिकित्सक


