योगिता का गांव पहुंचने पर गाजे-बाजे के साथ स्वागत

कोंडागांव| जिले की होनहार बालिका योगिता मंडावी ने जूडो खेल में असाधारण प्रदर्शन कर न केवल अपने जिले और प्रदेश, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। अपनी मेहनत, अनुशासन और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर योगिता को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो देश के बच्चों को मिलने वाला सर्वोच्च सम्मान है। नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने योगिता मंडावी को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर देशभर से चयनित प्रतिभाशाली बच्चों को खेल, नवाचार, कला-संस्कृति और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। योगिता मंडावी की कहानी केवल एक खिलाड़ी की सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष, संवेदना और संकल्प की प्रेरक मिसाल है। योगिता बचपन से ही छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित बालिका गृह, कोंडागांव में रहकर पली-बढ़ी। माता-पिता के साये से वंचित योगिता आज पूरे गांव की लाडली बेटी बन चुकी है। गांव पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और गाजे-बाजे के साथ उसका स्वागत किया गया। भावुक क्षण तब देखने को मिला जब योगिता के चाचा-चाची ने न सिर्फ योगिता का सम्मान किया, बल्कि उसके माता-पिता की तस्वीर पर भी फूलमालाएं चढ़ाकर उस मां-बाप को नमन किया, जिन्होंने ऐसी प्रतिभाशाली बेटी को जन्म दिया।

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