छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले की योगिता मंडावी को जूडो में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 21 जनवरी को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। यह पुरस्कार देश के प्रतिभाशाली बच्चों को खेल, नवाचार, कला-संस्कृति और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। योगिता ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से यह सम्मान हासिल कर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। योगिता मंडावी की कहानी संघर्ष और संकल्प की एक प्रेरक मिसाल है। बचपन से ही माता-पिता के साये से वंचित योगिता छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित बालिका गृह, कोंडागांव में पली-बढ़ी हैं। आज वह पूरे गांव की लाडली बेटी बन चुकी है। गांव लौटने पर योगिता का हुआ स्वागत पुरस्कार प्राप्त करने के बाद गांव लौटने पर योगिता का ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और गाजे-बाजे के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान एक भावुक क्षण भी आया जब उनके चाचा-चाची ने न केवल योगिता का सम्मान किया, बल्कि उनके दिवंगत माता-पिता की तस्वीर पर भी फूलमालाएं चढ़ाकर उन्हें नमन किया। मात्र 13 वर्ष की आयु में योगिता ने जूडो में राज्य की श्रेष्ठ खिलाड़ी का दर्जा हासिल किया था। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योगिता मंडावी की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली बच्चों की सफलता नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है और योगिता ने यह सिद्ध कर दिया है कि संसाधनों की कमी कभी भी सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकती।


