यूपी विधानमंडल में बजट सत्र का आज 5वां दिन है। सीएम विधानसभा में बोल रहे हैं। उन्होंने कहा- वंदे मातरम का अपमान कोई नहीं कर सकता। ये हिंदुस्तान की खाएंगे, लेकिन वंदे मातरम नहीं गाएंगे। ऐसे लोगों को यहां रहने का अधिकार नहीं है। जो इसका विरोध करता है, उसका कान पकड़कर बाहर करना चाहिए। सीएम ने कहा- आज यूपी में कोई भी तीर्थ स्थल हो, किसी भी धर्म के हो, उसे पौराणिक विषयों से जोड़ा गया। उसे विकसित किया। अर्थ व्यवस्था को मजबूत किया। वहां फूल बेचने वाला ब्राह्मण नहीं होगा, टैक्सी चलाने वाले ब्राह्मण नहीं होगा। ब्राह्मण पुजारी हो सकता है। लेकिन बाकी सब दूसरी जाति के हैं, मतलब हर वर्ग का व्यक्ति फायदा पा रहा है। 9 वर्ष की यह जो यात्रा है, वह सरकार की अपराध-अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है। उपद्रव से उत्सव की यात्रा है, समस्या से समाधान की यात्रा है। विश्वास से अविश्वास की यात्रा है। यह यात्रा सत्ता प्राप्त करने की होड़ नहीं है, इसे प्राप्त करने के लिए सरकार की नियत साफ थी। इससे पहले सीएम ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा- आप उचित बात करते हैं, लेकिन पता नहीं क्यों आपके और संजय निषाद के बीच रंजिश चल रही है। ऐसा लगता है कि आपकी भी पोखरी यानी तालाब का संजय निषाद पट्टा कराकर आ गए हैं। दरअसल, इससे पहले आरक्षण मुद्दे पर माता प्रसाद पांडेय और संजय निषाद के बीच तीखी बहस हो गई थी। महाना भाजपा विधायक पर भड़के, हेडफोन फेंका सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के थोड़ी देर बाद ही टोका-टोकी करने से अध्यक्ष सतीश महाना भाजपा विधायक केतकी सिंह पर भड़क गए। उन्होंने कहा- आप बैठिए। सदन चलाना मेरा काम है। गुस्से में उन्होंने हेडफोन निकालकर फेंक दिया। 10 मिनट के लिए सदन स्थगित करके कुर्सी से उठकर चले गए। वापस आए तो कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा ने कहा- आप मुस्कुराते अच्छे लगते हैं। फिर उन्होंने वित्त मंत्री से महाना को मनाने के लिए शायरी सुनाने की अपील की। तभी सपा के कमाल अख्तर ने शायरी सुनाई- तुम रूठा न करो, सबकी जान चली जाती है। तुम हंसते रहते हो, तो बिजली-सी चमक जाती है। इस पर वित्त मंत्री ने कहा- एक बात सुन लो, महबूबा वाली शायरी यहां न सुनाया करो। इसके बाद शायरी सुनाई। आज दुनिया को तरकीब बता दी जाए, दुश्मनी प्यार की लहरों में बहा दी जाए। मंत्री बोले- यूपी में आउटसोर्स कर्मचारी नियमित नहीं होंगे
विधानसभा में श्रम मंत्री अनिल राजभर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित (रेगुलर) नहीं किया जा सकता है। उनके साथ मनमानी न हो, इसलिए उनके लिए अलग से निगम बनाया गया है। शिक्षा मंत्री को नसीहत- अफसर को बचाइए मत, नहीं तो फसंगे वहीं, विधान परिषद में बदायूं में एक शिक्षक के निलंबन को लेकर मंत्री संदीप सिंह को सभापति ने नसीहत दी। कहा- अधिकारी को बचाने का प्रयास न करें, वरना आप फंस जाएंगे। ये सदन है। दरअसल, शिक्षक दल के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने एक मामला उठाया था, जहां एक प्रधानाध्यापक को बिना स्पष्टीकरण के निलंबन कर दिया था। विधान परिषद में शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा, शिक्षा मित्रों के मानदेय में बढ़ोत्तरी को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। इसे लेकर विपक्ष के सदस्य मान सिंह यादव ने कहा, यही आश्वासन सरकार ने पिछले सत्र में भी दिया था। सदन की कार्यवाही से जुड़े अपडेट्स के लिए लाइव ब्लााग से गुजर जाइए…


