भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि भारत अपना जनरेटिव एआई मॉडल जल्द विकसित कर लेगा। देश के युवा इस दिशा में तेजी से रिसर्च और डेटा पर काम कर रहे हैं। इसी दिशा में ग्वालियर के दो भाई रजत आर्य और चिराग आर्य ने अपना एआई मॉडल डेवलप किया है, जिसे नाम दिया है एलपाई। दोनों भाई इसरो के साथ इस रिसर्च में लगे हैं ताकि देश का अपना एआई मॉडल जल्द लांच किया जा सके। फोर्ब्स इंडिया की 2025 की 30 अंडर 30 लिस्ट में भी दोनों भाई शामिल हैं। ग्वालियर एमआईटीएस से पढ़े रजत और उनके भाई चिराग इस उपलब्धि से खासे उत्साहित हैं। फोर्ब्स इंडिया ने 19 कैटेगरी में इन विजेताओं के नाम घोषित किए हैं। सबसे नई कैटेगरी एआई है। इसी में उनका नाम है।
रजत अपने काम के बारे में बताते हैं कि वे काफी पहले से कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में काम कर रहे थे। 169 पाई नाम से उन्होंने अपनी कंपनी बनाई है। सबसे बड़ी सफलता उन्हें मिली जब इसरो ने उनके काम को मान्यता दी। इसके बाद वहां से उन्हें अपना एआई मॉडल डेवलप करने के प्रोजेक्ट में सहयोग मिला। गूगल ने भी 19 लाख रुपए की ग्रांट दीहै। इसके अलावा जीपीयू बनाने वाली एकमात्र कंपनी एनवीडिया से भी उन्हे मदद मिल रही है। उन्होंने अपनी एआई कंपनी के लिए आठ जीपीयू स्थापित कर लिए हैं। कैसे हुआ चयन रजत ने कहा- उनकी कंपनी के लिंक्ड इन प्रोफाइल से फोब्र्स को उनके काम का पता चला। वहां से आवेदन करने का मैसेज आया तो उन्होंने आवेदन कर दिया। कई स्तरों पर परखने के बाद उनके काम को मान्यता मिली। कोचिंग आईआधारित मॉडल बना रहे, निःशुल्क मिलेगी सुविधाएं उनका अपना एआई मॉडल एलपाइडॉटएआई (alpie.ai) फिलहाल वेब आधारित है। जल्द ही इसका एप लांच करेंगे। फिलहाल उनके पास 2 ट्रिलियन टोकन डेटा है। आठ जीपीयू भी हैं। डेमो देते हुए उन्होंने कुछ निबंध व लेख इस पर तैयार कर दिखाए। फिलहाल वे 8वीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए कोचिंग का आईआधारित मॉडल तैयार कर रहे हैं। इसमें सभी प्रश्नों के उत्तर बच्चे इस पर देख सकते हैं। यह पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। इंजीनियरिंग छोड़ मुंबई गए,
वहां ब्लॉकचेन टैक्नोलॉजी पर काम करना शुरू किया रजत कहते हैं मैं एमआईटीएस से सीएस ब्रांच में इंजीनियरिंग कर रहा था। आईआईटी में भी चयन हुआ था। अपने शहर में पढ़ाई करने का मन था। बावजूद इसके, जीवन में कुछ कमी महसूस हुई, तो इंजीनियरिंग छोड़कर मुंबई चला गया। वहां ब्लॉकचेन टैक्नोलॉजी पर काम किया। एक दिन चाय की टपरी पर चाय पीते हुए खुद की एआई कंपनी शुरू करने विचार आया। इसके बाद छोटे भाई चिराग को साथ लेकर यह सपना साकार किया।


