रत्न की जगह अब यंत्र मिलाकर ज्योतिषीय निवारण कर रहे:राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में आज भागवत गीता के ज्ञान और विज्ञान के पहलुओं पर चर्चा

उदयपुर में चल रहे राष्ट्रीय ज्योतिष शोध संगोष्ठी के दूसरे दिन ज्योतिष विद्वानों ने कई जानकारियां दी। इसमें प्रमुख रूप से जोर ​था कि अब रत्न की जगह अब यंत्र मिलाकर ज्योतिषीय निवारण किया जा रहा है और उसके बेहतर परिणाम आ रहे है। महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर के सहयोग से अखिल भारतीय प्राच्य ज्योतिष शोध संस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रीय ज्योतिष शोध संगोष्ठी में चर्चा के दौरान कहा गया कि ग्रहों में बदलाव होने के कारण आने वाली समस्याओं के निवारण के लिए अब तक रत्न पहनाकर उनका निवारण किया जाता था। अब कुंडली के ग्रह दोष के अनुसार यंत्र बनाकर उनका निवारण किया जा रहा है। इस तरह के उपचार का इस्तेमाल अब ज्यादा से ज्यादा किया जा रहा है। दूसरे दिन दूसरे दिन महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन सचिव डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि ज्योतिष विद्वानों ने विवाह में मंगलयोग का विचार पर अपने अनुभव साझा किए। इसके बाद आमजन के लिए निशुल्क परामर्श शिविर आयोजित हुआ जिसमें शहरवासियों ने अंक ज्योतिष, टैरो कार्ड रीडिंग, कुंडली परामर्श लिया और समाधान भी पूछे। गीतू नरयानी, वीरेन्द्र पुरोहित, मनोज कुमार गुप्ता, कीर्ति गुप्ता, श्वेता विजयवर्गीय, सुभद्रा देवी, मुकेश अग्रवाल, सुनैना पण्डिता, रमेश चन्द्र शर्मा, शालिनी सालेचा, सांवरमल दाधीच, हरि प्रकाश शर्मा, सीमा शर्मा, शशि भारद्वाज, दीप्ति शर्मा, सीमा शर्मा, हरदीप सिड़ाना, रूपिन्दर पुरी, नवेश वर्मा, दविन्दर कुमार सोनी, रितु शर्मा, पुष्पदत्त दवे, महावीर स्वामी, श्यामधर शास्त्री, राजेश वाजपेयी, अनिल चौहान, कैलाश चन्द्र शर्मा, साधना चौहान, शनि वर्मा, संजय जे. मराठे, विनीता चौहान, मीनाक्षी सिसोदिया, प्रिया सोनी, गोविन्द सिंह राठौड़, विनोद वैष्णव ने पत्रवाचन किया। विवाह में कुंडली मिलाने तक सीमित नहीं, अथाह सागर है ज्योतिष विद्या इस दौरान डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि आज की पीढ़ी भले ही ज्योतिष विद्या की सिर्फ विवाह से कुंडली मिलाने की आवश्यकता तक समझ रहे हैं। लेकिन यह विद्या अथाह सागर की तरह है। हमारा दैनिक जीवन हर तरह से ज्योतिष विद्या से जुड़ा हुआ है। ज्योतिष विद्या हमारे देश की धरोहर है जिसे सहेजे रखना आवश्यक है। महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन का हमेशा यह प्रयास रहेगा कि इस विद्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास संभव होंगे, वे किए जाएंगे। कुंडली में बैठे ग्रहों के अनुसार बनते यंत्र
ज्योतिषियों ने बताया कि कई बार राशि के अनुसार रत्न पहनने पर भी उसका वो प्रभाव देखने को नहीं मिलता जो होना चाहिए। ऐसे में हम कुंडली देखकर ग्रहों की जो भी चाल होती है उसके अनुसार यंत्र बनाया जाता है और ज्योतिषीय निवारण किया जाता है। इसमें उन्हें ग्रहों के अनुसार मंत्र भी बताए जाते हैं जिसका उच्चारण करने से उनका निवारण किया जा सकता है। इसके अलावा वास्तु के एक प्रमुख दोष के बारे में भी चर्चा की गई कि की घर में सीधा प्रवेश नहीं होना चाहिए। इसके कारण पारिवारिक असंतुलन और अशांति रहती है। मनोज गुप्ता ने बताया कि राहु को विनाशकारी ग्रह बताया जाता है लेकिन यह उन महिलाओं के लिए सकारात्मकता ला रहा है जो पुरुष प्रधान क्षेत्र जैसे इंजीनियरिंग की कुछ शाखाएं, डेटा साइंस, पायलट में अपना कॅरियर बना रही हैं। महिलाएं फोकस होकर और अधिक समर्पण के साथ काम काम करती हैं। ऐसे में राहु, जो चतुर ग्रह है वह उन्हें अच्छे परिणाम देने में मदद करता है। आज इस पर होगी चर्चा संयोजक पं. चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि 15 दिसंबर को भागवत गीता के ज्ञान और विज्ञान के पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।

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