किताबों को रद्दी में बेचने के मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दरअसल, पांच जिला शिक्षा अधिकारियों को बचाने के लिए अफसरों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक से झूठ बोलवा दिया। मामला इस तरह है कि 3 दिसंबर को ही अपर मुख्य सचिव रेणु पिल्ले ने अपनी जांच रिपोर्ट सचिव सामान्य प्रशासन को सौंप दी थी। उसके बावजूद अफसरों ने 13 दिन बाद 16 दिसंबर 2024 को सीएम से यह कहलवा दिया कि अभी जांच चल रही है। जनवरी में जांच रिपोर्ट सामान्य विभाग से शिक्षा विभाग के सचिव को भेजी जा चुकी है। शिक्षा विभाग ने भी डीपीआई को रिपोर्ट भेजकर दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए कहा है। अब डीपीआई और मंत्रालय एक दूसरे के पाले में कार्रवाई की गेंद फेंकने में लगे हुए हैं। डीईओ की गलती की सजा, दूसरे को मिली
डीईओ की गलती की सजा केवल एक अधिकारी को दी गई है। पाठ्यपुस्तक निगम के तत्कालीन जीएम प्रेम प्रकाश शर्मा को मामला सामने आने के चार दिन बाद ही निलंबित कर दिया गया। जबकि रेणु पिल्ले और शिक्षा विभाग दोनों की रिपोर्ट में इन्हें दोषी नहीं पाया गया है। वजह यह है कि किताबें जिलों के निगम डिपो और संकुल से निकालकर बेची गई। पाठ्य पुस्तक निगम का हेड ऑफिस नवा रायपुर में है, यहां कोई किताब आती ही नहीं। इसके अलावा जीएम निगम डिपो को कोई निर्देश भी नहीं देता। ऐसे में केवल कार्रवाई की खानापूर्ति करने के लिए 6 महीने से एक अफसर सस्पेंड चल रहे हैं। विभाग ने जानकारी छिपाकर रखी 15 सितंबर 2024 को किताबें बेचे जाने का मामला प्रकाश में आया। अगले ही दिन शिक्षा विभाग ने पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई। जांच रिपोर्ट दबा दी गई
रिपोर्ट में रेणु पिल्ले ने राजनांदगांव, धमतरी, जशपुर और सुरजपूर के डीईओ को दोषी बताया है। 9 जनवरी 2025 को सामान्य प्रशासन के उप सचिव अन्वेष घृतलहरे ने सचिव स्कूल शिक्षा विभाग को इनके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए लिखा, पर न तो कार्रवाई हुई न एफआईआर। जारी कर दिए हैं निर्देश
डीपीआई व पापुनि को कार्रवाई करने निर्देशित किया गया है। निजी व्यक्तियों पर एफआईआर करने के लिए कहा गया है। अब तक कार्रवाई नहीं हुई है, यह तो डीपीआई बता पाएगा। हमने जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्देश जारी कर दिए हैं। – आरपी वर्मा, अवर सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग सीधी बात – दिव्या मिश्रा, संचालक, डीपीआई पत्र मिला है, जो भी कार्रवाई करनी है वह शासन करेगा रद्दी में बेची गई किताबों के लिए दोषियों पर कार्रवाई करने के लिए विभाग का पत्र आपको मिला है?
-हां, पत्र मिल चुका है।
5 डीईओ पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
-हम शासन को प्रस्ताव भेज देंगे। क्योंकि जो डीईओ होते हैं, उनका नियोक्ता शासन होता है। इसलिए जो कार्रवाई करनी है वह शासन ही करेगा।
निजी व्यक्तियों पर एफआईआर क्यों नहीं करवाई गई?
-वह भी शासन ही करेगा। हम उनको लिखकर भेज देंगे।


