रवीन्द्र मंच की जर्जर स्थिति पर भावुक हुए कलाकार:धर्मेन्द्र शर्मा बतियन की गली में बोले- कलाओं के लिए लड़ना होगा,बिना संघर्ष सरकारें नहीं सुनती

राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के टी ट्रेडिशन कैफे में क्यूरियो संस्था और राजस्थान फोरम की ओर से आयोजित चर्चित संवाद श्रृंखला बतियन की गली के चौथे सीजन की चौथी कड़ी में थिएटर,टीवी और फिल्म निर्देशक धर्मेंद्र शर्मा रूबरू हुए।
इस मौके पर कार्यक्रम की परिकल्पना-कार प्रियदर्शिनी मिश्रा के सवालों के जवाब में शर्मा ने रंगमंच, टेलीविजन,सिनेमा और वेब कंटेंट के बदलते परिदृश्य पर बेबाक राय रखी।
रवीन्द्र मंच की वर्तमान जर्जर स्थिति पर बोलते हुए धर्मेंद्र शर्मा भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यहीं से उनके अभिनय और निर्देशन जीवन की शुरुआत हुई थी। पहले की तुलना में आज रवीन्द्र मंच की हालत देखकर दुःख होता है। सरकारें अपने आप नहीं सुनती, इसके लिए लड़ना पड़ेगा। उन्होंने 90 के दशक के अंत में हुए कलाकारों के सामूहिक आंदोलन का जिक्र करते हुए जोर दिया कि सभी रंगकर्मियों और संस्थाओं को एकजुट होकर लगातार दबाव बनाना होगा, तभी हालात बदलेंगे। टेलीविजन एक मैकेनिकल प्रक्रिया, जहां निर्देशक कठपुतली जैसा
थपकी प्यार की, जानकी, ससुराल गेंदा फूल, पटियाला बेब्स जैसे कई टीवी शोज और बींद बनुगों घोड़ी चढूलों, जी ले जरा जैसी फिल्मों को निर्देशित कर चुके धर्मेंद्र ने टीआरपी के दौर में क्रिएटिविटी पर पड़ रहे असर को लेकर टेलीविजन इंडस्ट्री की हकीकत सामने रखी। उनके अनुसार आज निर्देशक पर टीआरपी का इतना दबाव है कि वह रचनात्मक फैसलों में स्वतंत्र नहीं रह गया। टेलीविजन अब एक मैकेनिकल प्रक्रिया बन गया है, जहां निर्देशक कठपुतली जैसा हो गया है। हालांकि फिल्मों और वेब सीरीज में बेहतर प्री-प्रोडक्शन के कारण क्रिएटिव स्पेस अभी भी अपेक्षाकृत बचा हुआ है। राजस्थानी सिनेमा पर चर्चा करते हुए उन्होंने इसके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद जताई। उनका मानना है कि फिल्मों का बनना जरूरी है, जो हो रहा है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उनका दर्शकों तक पहुंचना। बजट में प्रचार और पब्लिसिटी को शामिल किए बिना दर्शक नहीं मिल सकते। स्टेट ओटीटी प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि दर्शक मौजूद हैं, बस सही रणनीति की जरूरत है। वेब कंटेंट को लेकर धर्मेंद्र शर्मा ने इसे मौजूदा दौर का सबसे बड़ा आकर्षण बताया। सेंसरशिप की कमी को इसकी ताकत बताते हुए उन्होंने साथ ही सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की भी अपील की, ताकि फुहड़ता और हिंसा से बचा जा सके। इस मौके पर धर्मेंद्र की निर्देशित फिल्म जी ले जरा को भी दर्शकों को दिखाया गया।
शिवानी सिंह को मिला कर्मठ युवा सामान
कार्यक्रम के दौरान सांगानेरी ब्लॉक प्रिंटिंग में प्रयोगधर्मी कार्य के लिए विजुअल आर्टिस्ट शिवानी सिंह को कर्मठ युवा सम्मान प्रदान किया गया। ओरियन ग्रीन्स और मृदुल एंड रोहन कं के सहयोग से हुए इस कड़ी में कला समीक्षक सर्वेश भट्ट, कवि लोकेश सिंह साहिल, गगन मिश्रा, पर्यावरणविद् नीता उपाध्याय, रेशमा खान समेत रंगमंच और राजस्थानी सिनेमा की कई जानी मानी हस्तियां मौजूद रही।

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