रांची के बेटे का बॉलीवुड में कमाल… सिनेमेटोग्राफर आद्री ठाकुर की फिल्म ‘जब खुली किताब’ हुई रिलीज

रांची के नॉर्थ ऑफिस पाड़ा के रहने वाले प्रतिभाशाली सिनेमेटोग्राफर आद्री ठाकुर के लिए शुक्रवार का दिन बेहद खास रहा। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जब खुली किताब’ 6 मार्च को रिलीज हुई। फिल्म का निर्देशन मशहूर अभिनेता और निर्देशक सौरभ शुक्ला ने किया है। अनुभवी अभिनेता पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया की मुख्य भूमिकाओं से सजी यह फिल्म अपनी कहानी और विजुअल को लेकर चर्चा में है। आद्री झारखंड के प्रसिद्ध चित्रकार हरेन ठाकुर व शर्मीला ठाकुर के पुत्र हैं। डीएवी श्यामली से स्कूलिंग की, फिर गुरुनानक स्कूल से प्लस टू किया। आगे पुणे यूनिवर्सिटी से बीकॉम किया। ग्रेजुएशन के बाद कोलकाता गया, जहां ‘चित्रवाणी’ में ढेर सारी फिल्मों की किताबें पढ़ीं, फिल्मों और लीजेंड के बारे में जाना, जिससे रुचि उत्पन्न हुई। फिर सोच लिया कि अब फिल्मों के फील्ड में ही करियर बनाऊंगा और इसी में रम गया। वे पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सिनेमेटोग्राफी कोर्स में एडमिशन लिया और 2006 में इसे कंप्लीट किया। ‘दम लगा के हईशा’, ‘बदला’, ‘पिंक’, ‘फैन’, ‘शिवाय’, ‘धमाका’, ‘द गोन गेम’ सहित दर्जन से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके है‍ं। पहाड़ों को कैनवास जैसा फिल्म में उतारा फिल्म की शूटिंग के बारे में बताते हुए आद्री ने कहा कि रानीखेत की प्राकृतिक सुंदरता ने फिल्म के लिए एक बेहतरीन कैनवास का काम किया। यह फिल्म हमारी पूरी टीम के सामंजस्य का प्रमाण है। आज के समय में ऐसी एकजुट टीम मिलना दुर्लभ है। मुझे इस कहानी को कैमरे में कैद करने का सौभाग्य मिला और मुझे उम्मीद है कि दर्शक उस प्यार को महसूस करेंगे जो हमने हर फ्रेम में डाला है। सौरभ शुक्ला के निर्देशन में काम करना शानदार अनुभव : आद्री
अपनी इस उपलब्धि पर आद्री ठाकुर ने भावुक होते हुए कहा, ‘जब खुली किताब’ पर काम करना मुझे एक काम की तरह नहीं, बल्कि प्यार और रचनात्मकता के एक बुलबुले में जीने जैसा महसूस हुआ। सौरभ शुक्ला सर ने मुझ पर भरोसा जताया और रचनात्मक स्वतंत्रता दी। इस आजादी ने मुझे नए विजुअल अनुभवों को तलाशने का मौका दिया। जब डिंपल कपाड़िया मैम और पंकज कपूर जी फ्रेम में आते थे, तो पूरा दृश्य रोशन हो जाता था। उनका अभिनय ही नहीं, बल्कि उनका व्यक्तित्व कैमरे पर चमकता है।’ अपारशक्ति खुराना की ऊर्जा की तारीफ करते हुए कहा कि उनके होने से सेट पर कभी सुस्ती महसूस नहीं हुई। उन्होंने अपने निर्माता नरेन और महेश को अपनी ताकत का स्तंभ बताया और पूरी क्रू (कॉस्ट्यूम, साउंड, म्यूजिक और प्रोडक्शन डिजाइन) के तालमेल को फिल्म की सफलता का श्रेय दिया।
पिता हरेन ठाकुर संग आद्री। city achiever

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