झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के सदर अस्पताल में एक गर्भवती को एंबुलेंस से उतार कर 400 मीटर पैदल ले जाने के मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस ने दैनिक भास्कर के 8 अगस्त के अंक में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेते हुए इस मामले को जनहित याचिका में तब्दील करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस मामले में स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगते हुए मामले की सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की है। गुरुवार दोपहर दो बजे बजरा नदी टोली निवासी गर्भवती पुष्पा नाग को लेकर उसके परिजन सदर अस्पताल पहुंचे। मुख्य गेट से इमरजेंसी गेट तक रास्ते में दोनों ओर वाहनों की कतार थी। पार्किंग ठेकेदार तीन लेयर में वाहन लगवाए हुए था। इस वजह से एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ पाया। एंबुलेंस का सायरन बजता रहा, लेकिन पार्किंग ठेकेदार गाड़ी हटवाने के लिए आगे नहीं आया। ऐसे में मुख्य द्वार के पास ही एंबुलेंस को रोकना पड़ा। एंबुलेंस में पुष्पा दर्द से कराह रही थी। उसकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए परिजनों ने वहीं उसे एंबुलेंस से उतार लिया। एक परिजन ने इमरजेंसी के पास कर्मचारियों से ट्रॉली या व्हील चेयर मांगा, लेकिन नहीं मिला। फिर परिजन कंधे का सहारा देकर गर्भवती को इमरजेंसी तक पहुंचाया।
शहर में झूलते बिजली के तार पर भी स्वत: संज्ञान, मांगा जवाब: हाईकोर्ट ने शहर में बिजली के पोल से नीचे झूलते बिजली के तार से संबंधित मीडिया रिपोर्ट पर भी स्वत: संज्ञान लिया है। अदालत ने इस मामले में भी सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई भी सोमवार को होने की संभावना है।


