वरिष्ठ लेखक और रंगकर्मी राघवेन्द्र रावत की नवीनतम पुस्तक ‘गम ए रोजगार में जैसलमेर’ का लोकार्पण रविवार को प्रौढ़ शिक्षा समिति, झालाना(जयपुर) में आयोजित समारोह में संपन्न हुआ। वरिष्ठ आलोचक डॉ. जीवन सिंह मानवी ने कहा कि गालिब ने जीवन के छोटे-मोटे दुखों को महत्व नहीं दिया, बल्कि इश्क का दर्द ही जिंदगी को अर्थ देने वाला बताया है। इसी तरह लेखकों की जिम्मेदारी होती है कि वे शहरों और किरदारों को ईमानदारी से लिखें और मिथकों व अप्रमाणिक इतिहास से बचें। जनवादी लेखक संघ, राजस्थान और अमोर आर्टिस कला एवं संस्कृति सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से साहित्यकारों, आलोचकों, पत्रकारों और कला से जुड़े लोगों ने भाग लिया। संस्मरण, डायरी और रेखाचित्रों का सुंदर मेल है यह किताब वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सूरज पालीवाल ने कहा कि यह किताब संस्मरण, डायरी और रेखाचित्रों का सुंदर मेल है। इसमें कवितामय गद्य है और जैसलमेर के असली लोगों और किरदारों की गहरी झलक मिलती है। उन्होंने कहा कि यह जैसलमेर को समझने के लिए जरूरी पुस्तक है। किताब खुद अपनी बात कहती है- थानवी वरिष्ठ पत्रकार-संपादक ओम थानवी ने कहा कि किताब खुद अपनी बात कहती है। यह किताब पर्यटन नहीं बल्कि सांस्कृतिक इतिहास पर आधारित साहित्यिक कृति है। उन्होंने कहा कि चर्चा समारोहों की अवधि डेढ़ घंटे से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और कार्यक्रम में किताब के अंश पढ़ना पाठक का रोमांच कम कर देता है। वरिष्ठ आलोचक राजाराम भादू ने कहा कि पुस्तक एक सचेत व्यक्ति और रंगकर्मी की संवेदना से लिखी गई है। इसमें जैसलमेर की संस्कृति, पर्यटन और समाज का वास्तविक चित्र मौजूद है। इस किताब में लेखक के कई रूप दिखाई देते हैं- अग्रवाल डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने कहा कि इस किताब में लेखक के कई रूप दिखाई देते हैं, कवि, रंगकर्मी, शायर, इंजीनियर, पर्यटक और पारिवारिक व्यक्ति। इसमें सीमांत क्षेत्रों के दर्द और सरकारी नौकरी के दबाव का सच्चा वर्णन भी है। प्रो. राजीव गुप्ता ने कहा कि किसी भी किताब के लिए लेखक का दृष्टिकोण बेहद जरूरी है। यह संस्मरण समाजशास्त्र के विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी हैं। मनुष्य को भीतर से बचाने की कोशिश है यह पुस्तक कार्यक्रम में लेखक डॉ. राघवेंद्र रावत ने कहा कि उन्होंने हमेशा पढ़ा अधिक और लिखा कम है। यह पुस्तक मनुष्य को भीतर से बचाने की कोशिश है। हर व्यक्ति के पास स्मृतियों का खजाना होता है, उसे शिल्प से पाठकों तक पहुंचाना एक कला है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विशाल विक्रम सिंह ने किया।


